कार्यक्रम के दौरान महिलाओं को बताया गया कि माहवारी कोई बीमारी या शर्म की बात नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी एक सामान्य जैविक प्रक्रिया है। माहवारी के समय साफ-सफाई न रखने से संक्रमण, कमजोरी, पेट दर्द, त्वचा रोग एवं अन्य स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। सही समय पर पैड बदलना, हाथ धोना, साफ कपड़े पहनना और संतुलित आहार लेने पर विशेष जोर दिया गया।
स्वच्छ निपटान के तरीकों को अपनाने की अपील की
साथ ही माहवारी के दौरान उपयोग किए गए सैनिटरी पैड के सुरक्षित निपटान पर भी विस्तार से चर्चा की गई। महिलाओं को बताया गया कि खुले में या नालियों में पैड फेंकने से मिट्टी, जल और वातावरण में प्रदूषण फैलता है, जिससे समाज और आने वाली पीढ़ियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। स्वच्छ निपटान के तरीकों को अपनाने की अपील की गई।
इस अवसर पर महिलाओं एवं किशोरियों को निःशुल्क “बाला पैड” का वितरण किया गया, जिससे उन्हें सुरक्षित और स्वच्छ विकल्प उपलब्ध कराया जा सके।
कार्यक्रम को सफल बनाने में मुखिया नागी हेंब्रम, सविता, शांति, नागी मुर्मू, ननिका तथा सभी ग्रामीण महिलाओं का महत्वपूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ।
जागरूकता कार्यक्रम लगातार जारी रखे
डॉ. मनीष झा ने अपने संबोधन में कहा कि माहवारी स्वच्छता महिलाओं के स्वास्थ्य, आत्मसम्मान और सशक्तिकरण से सीधे जुड़ी हुई है। सही जानकारी और जागरूकता से न केवल महिलाओं को स्वस्थ रखा जा सकता है, बल्कि पर्यावरण प्रदूषण को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है। भविष्य में ऐसे जागरूकता कार्यक्रम लगातार जारी रखे जाएंगे।