Jharkhand News: महालेखाकार ने राज्य सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2024-25 में बिना पूर्व सलाह के बजट उप-शीर्ष (Sub-head) खोलने और उसमें 200 करोड़ रुपये का प्रावधान करने पर आपत्ति जतायी है. यह मामला उस समय सामने आया है, जब संवैधानिक प्रावधानों के तहत वित्तीय अनुशासन और निर्धारित प्रक्रिया के पालन को अनिवार्य माना गया है.
15 उप-शीर्ष बिना अनुमति खोले गए
राज्य सरकार ने वर्ष 2024-25 में महालेखाकार से परामर्श लिये बिना कुल 15 नए उप-शीर्ष खोल दिए और इन्हीं उप-शीर्षों के अंतर्गत 200 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान कर दिया गया. नियमानुसार ऐसा कदम उठाने से पहले महालेखाकार की स्वीकृति आवश्यक होती है, लेकिन इस प्रक्रिया को दरकिनार किया गया.
तय प्रपत्र में ही रखना होता है आय-व्यय
संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार राज्य सरकार को अपने समस्त वित्तीय आय-व्यय का विवरण एक निश्चित प्रपत्र में रखना होता है. बजट में राजस्व और व्यय के लिए अलग-अलग शीर्ष और उप-शीर्ष निर्धारित होते हैं और प्रत्येक लेन-देन इन्हीं के अंतर्गत दर्ज किया जाना अनिवार्य है, ताकि लेखा-प्रणाली पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनी रहे.
नियमों की अनदेखी पर आपत्ति
नियम यह स्पष्ट करते हैं कि यदि सरकार को किसी नए वित्तीय लेन-देन के लिए नया शीर्ष या पहले से मौजूद किसी शीर्ष में नया उप-शीर्ष खोलना हो, तो पहले महालेखाकार से सलाह लेना जरूरी है. सलाह मिलने के बाद ही किसी उप-शीर्ष को औपचारिक रूप से खोला जा सकता है, लेकिन राज्य सरकार ने इस अनिवार्य प्रक्रिया का पालन नहीं किया.
इस तरह की वित्तीय अनियमितताओं से न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं, बल्कि आम नागरिकों का भरोसा भी प्रभावित होता है, क्योंकि बजट से जुड़े निर्णय सीधे विकास योजनाओं और जनहित कार्यक्रमों से जुड़े होते हैं.