Jamshedpur: टाटा स्टील ट्यूब डिवीजन को लेकर एक गंभीर खबर सामने आई है, बताया जा रहा है कि ट्यूब डिवीजन को बंद करने के कवायद तेज कर दी गई है। इसके साथ ही अब कर्मचारियों पर संकट के बादल मंडरा रहे है।
यूनियन और प्रबंधन की हाई-लेवल मीटिंग
सोमवार को इस गंभीर मसले पर टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष संजीव चौधरी टुन्नु ने कमेटी मेंबरों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में कंपनी के सीएचआरओ जुबिन पालिया समेत कई उच्चाधिकारी मौजूद थे। प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि ट्यूब डिवीजन का परिचालन खर्च काफी अधिक हो गया है, जिसे कम करना कंपनी की प्राथमिकता है।
ESS का लक्ष्य नहीं हुआ पूरा
बैठक में यह तथ्य सामने आया कि कंपनी ने मैनपावर कम करने के लिए अर्ली सेपरेशन स्कीम ESS लागू की थी। कंपनी का लक्ष्य कम से कम 240 कर्मचारियों की संख्या घटाना था, लेकिन अब तक केवल 105 कर्मचारियों ने ही इसका लाभ लिया है। लक्ष्य पूरा न होने के कारण प्रबंधन अब कड़े कदम उठाने की तैयारी में है।
एग्रिको मॉडल पर चलाने की योजना
सूत्रों के अनुसार, टाटा स्टील अपने ट्यूब डिवीजन को एग्रिको की तर्ज पर चलाने की योजना बना रही है। एग्रिको में उत्पादन का काम बाहरी एजेंसियों के माध्यम से होता है, जिससे कंपनी की लागत कम रहती है। ट्यूब डिवीजन में भी यही मॉडल लागू करने की कोशिश है, ताकि स्थायी मैनपावर का बोझ कम किया जा सके।
यूनियन की चेतावनी और प्रबंधन का आश्वासन
यूनियन अध्यक्ष संजीव चौधरी टुन्नु ने प्रबंधन से कड़ा आग्रह किया है कि जब तक यूनियन स्तर पर कोई ठोस वार्ता नहीं हो जाती, तब तक किसी भी कर्मचारी को जबरन दूसरे विभाग में न भेजा जाए। यूनियन ने साफ किया कि कर्मचारियों के हितों के साथ समझौता नहीं होगा। इस पर प्रबंधन ने आश्वासन दिया है कि वे यूनियन की बातों पर विचार करेंगे और फिलहाल कोई भी कदम उठाने से पहले संवाद करेंगे।