Vijaya Ekadashi: हिन्दू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व होता है और इन्हीं में से एक है विजया एकादशी। यह पावन व्रत भगवान श्रीहरि विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए रखा जाता है। वर्ष 2026 में विजया एकादशी का व्रत 13 फरवरी, शुक्रवार को रखा जाएगा।
पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ 12 फरवरी 2026 को दोपहर 12 बजकर 23 मिनट पर होगा, जबकि इसका समापन 13 फरवरी को दोपहर 2 बजकर 26 मिनट पर होगा। चूँकि एकादशी तिथि 13 फरवरी को सूर्योदय के समय विद्यमान रहेगी, इसलिए इसी दिन व्रत रखना शास्त्रसम्मत माना गया है।
कब होगा एकादशी व्रत का पारण?
एकादशी व्रत का पारण हमेशा द्वादशी तिथि में किया जाता है।
14 फरवरी 2026 को द्वादशी तिथि रहेगी, जो शाम 4 बजे तक मान्य होगी। व्रती श्रद्धालु इसी दिन शुभ मुहूर्त में व्रत का पारण कर सकते हैं।
विजया एकादशी 2026 के शुभ मुहूर्त
व्रत और पूजा को सफल बनाने के लिए शुभ मुहूर्त का विशेष ध्यान रखा जाता है। इस दिन निम्नलिखित समय अत्यंत शुभ माने गए हैं:
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 05:27 से 06:15 बजे तक
अमृत काल: सुबह 09:13 से 10:59 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:18 से 01:03 बजे तक
इन मुहूर्तों में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
विजया एकादशी का धार्मिक महत्व
विजया एकादशी का व्रत केवल उपवास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आस्था, संयम और आत्मबल का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से व्यक्ति को कष्टों से मुक्ति, शत्रुओं पर विजय और जीवन में सफलता प्राप्त होती है।
पुराणों में वर्णित कथाओं के अनुसार, जब कोई भक्त कठिन परिस्थितियों में फंस जाता है, तब विजया एकादशी का व्रत उसे मानसिक और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करता है। विशेष रूप से माता लक्ष्मी की कृपा से धन, सुख और समृद्धि में वृद्धि होती है।
विजया एकादशी की पूजा विधि
पद्म पुराण और भागवत पुराण के अनुसार, विजया एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा का विशेष विधान बताया गया है।
प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर कुशा और मिट्टी के लेप से स्नान करें
स्वच्छ वस्त्र धारण कर व्रत का संकल्प लें
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भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र के सामने चंदन, अक्षत, पुष्प, धूप-दीप और नैवेद्य अर्पित करें
- पूजा के दौरान “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का निरंतर जप करें
- विष्णु सहस्रनाम या विजया एकादशी व्रत कथा का पाठ करें
- दिनभर फलाहार रखें और दान-पुण्य अवश्य करें
- मान्यता है कि इस प्रकार श्रद्धा और नियम से पूजा करने पर श्रीहरि शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
क्यों कहलाती है "विजया" एकादशी?
फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को विजया एकादशी इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह व्रत व्यक्ति को हर प्रकार की नकारात्मक शक्तियों और विरोधियों पर विजय दिलाने वाला माना गया है। कहा जाता है कि जो भक्त सच्चे मन से इस व्रत को करता है, वह जीवन की कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी सफलता प्राप्त करता है।
विजया एकादशी केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि यह धैर्य, विश्वास और आत्म-समर्पण का पर्व है। यह व्रत हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति और संयम से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि प्राप्त की जा सकती है।