Jharkhand News: राज्य सूचीबद्धता समिति की एक अहम बैठक मंगलवार को हुई, जिसमें स्वास्थ्य योजनाओं से जुड़े निजी अस्पतालों के कामकाज और निगरानी को लेकर कई बड़े फैसले लिए गए. बैठक की अध्यक्षता झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी के कार्यकारी निदेशक छवि रंजन ने की. बैठक में साफ कहा गया कि अब नियमों का कड़ाई से पालन करना सभी सूचीबद्ध अस्पतालों के लिए जरूरी होगा.
तकनीकी गड़बड़ी या मानवीय गलती से डाली गई कुछ विड्रॉल रिक्वेस्ट पर चर्चा
बैठक के दौरान एचईएम 2.0 पोर्टल पर तकनीकी गड़बड़ी या मानवीय गलती से डाली गई कुछ विड्रॉल रिक्वेस्ट पर चर्चा की गई. अस्पतालों द्वारा भेजे गए ईमेल और संबंधित जिलों के सिविल सर्जनों की सिफारिश के बाद चार अस्पतालों की रिक्वेस्ट रद्द करने का फैसला लिया गया. इनमें हजारीबाग का न्यू झारखंड नर्सिंग होम, पूर्वी सिंहभूम का टाटा मोटर्स हॉस्पिटल प्लांट, पलामू का श्री नारायण मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल और मय्यन बाबू अस्पताल शामिल हैं.
समिति के सामने यह बात भी आई कि कई निजी अस्पतालों ने एचईएम 2.0 पोर्टल पर अपग्रेडेशन के लिए आवेदन करते समय जरूरी कानूनी दस्तावेज अपलोड नहीं किए हैं. खासकर रांची नगर निगम, डीआरडीए या बीडीओ से स्वीकृत भवन नक्शे से जुड़े कागजातों की कमी पाई गई.
इकरारनामा और संबंधित लाइसेंस पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य
इसके अलावा बैठक में यह भी तय किया गया कि फार्मेसी, ब्लड बैंक और रेडियोलॉजी जैसी आउटसोर्स सेवाओं के लिए स्टांप पेपर पर किया गया इकरारनामा और संबंधित लाइसेंस पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा. इन खामियों को देखते हुए तीन अस्पतालों के अपग्रेडेशन अनुरोधों पर फिलहाल रोक लगा दी गई है.
समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि एचईएम 2.0 पोर्टल पर माइग्रेशन किए बिना किसी भी डॉक्टर या विशेषज्ञ को जोड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी.
इन सभी फैसलों को आयुष्मान भारत मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत इलाज में पारदर्शिता, गुणवत्ता और मरीजों के हितों की सुरक्षा के लिए एक अहम कदम माना जा रहा है.