Jharkhand News: देश के कोयला उद्योग पर एक बार फिर संकट के बादल मंडराने लगे हैं. झारखंड कोलियरी मजदूर यूनियन (JCMU) ने 12 फरवरी से पूरे देश में कोयला खदानों में काम बंद करने की चेतावनी दी है. यूनियन ने कोल इंडिया लिमिटेड को औपचारिक नोटिस देकर साफ कर दिया है कि अगर उनकी मांगों पर बातचीत नहीं हुई, तो देशव्यापी हड़ताल टाली नहीं जाएगी.
मजदूरों में क्यों बढ़ रहा गुस्सा
यूनियन का आरोप है कि सरकार की नई श्रम नीतियां और कोयला क्षेत्र में तेजी से हो रहा निजीकरण मजदूरों के भविष्य को खतरे में डाल रहा है. उनका कहना है कि चार श्रम संहिताएं लागू होने के बाद कर्मचारियों के अधिकार कमजोर हुए हैं और सामाजिक सुरक्षा भी प्रभावित हुई है.
निजी कंपनियों को सौंपे जा रहे काम पर नाराजगी
जेसीएमयू का कहना है कि कोल इंडिया और उसकी सहयोगी कंपनियों में ठेके पर काम देने की नीति से स्थायी नौकरियां खत्म हो रही हैं. यूनियन ने वाणिज्यिक कोयला खनन, विनिवेश और शेयर बिक्री जैसी योजनाओं को तुरंत रोकने की मांग की है.
वेतन और ग्रेच्युटी को लेकर भी टकराव
यूनियन ने कर्मचारियों के लंबित वेतन लाभ, सेवानिवृत्त कर्मियों की ग्रेच्युटी और नए वेतन समझौते को लेकर भी प्रबंधन पर अनदेखी का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि जेबीसीसीआई-11 के गठन में देरी से मजदूरों में असंतोष और बढ़ गया है.
हड़ताल की जानकारी कोल इंडिया के शीर्ष अधिकारियों और श्रम विभाग को दे दी गई है. यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि बातचीत नहीं हुई तो 12 फरवरी से खदानों में चक्का जाम होगा और इसके परिणाम की जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी.