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  • 2026-02-11

Chakradharpur News: चक्रधरपुर में जर्जर सरकारी आवास बना नशाखोरी का अड्डा, स्कूली बच्चे भी करते डेंड्राइट जैसे पदार्थों का सेवन

Chakradharpur: चक्रधरपुर प्रखंड कार्यालय परिसर में स्थित पुराने सरकारी आवास इन दिनों स्थानीय लोगों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया हैं। वर्षों से मरम्मत के अभाव में ये भवन अब खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। दीवारें टूट चुकी हैं, खिड़कियां और दरवाजे उखड़ गए हैं, और परिसर में किसी तरह की सुरक्षा व्यवस्था नहीं है। इसी लापरवाही का फायदा उठाकर असामाजिक तत्वों और नाबालिग बच्चों की यहां आवाजाही बढ़ गई है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि स्कूल की छुट्टी के बाद कुछ बच्चे इन खाली पड़े क्वार्टरों में इकट्ठा होते हैं और नशे का सेवन करते देखे जा रहे हैं। खासकर डेंड्राइट जैसे पदार्थों का उपयोग किए जाने की सूचना से इलाके में बेचैनी बढ़ गई है। लोगों का मानना है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

शिक्षकों ने जताई गहरी चिंता, अभिभावकों से सतर्क रहने की अपील
अंचल कॉलोनी स्थित एक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका और शिक्षिकाओं ने इस मामले को बहुत चिंताजनक बताया है। उनका कहना है कि कुछ विद्यार्थी पढ़ाई से ध्यान हटाकर गलत संगत में पड़ते नजर आ रहे हैं। शिक्षकों का मानना है कि नशे की लत कम उम्र में बच्चों के भविष्य को बर्बाद कर सकती है।

स्कूल प्रबंधन ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखें और स्कूल समय के बाद उनकी उपस्थिति और संगत के बारे में सजग रहें। शिक्षकों ने यह भी कहा कि समाज और परिवार की संयुक्त जिम्मेदारी से ही इस समस्या का समाधान संभव है।

प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि जर्जर भवनों को तुरंत सील किया जाए या उन्हें ध्वस्त कर दिया जाए, ताकि उनका दुरुपयोग न हो सके। साथ ही परिसर में नियमित पुलिस गश्ती और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी मांग की गई है।

लोगों का कहना है कि नाबालिगों में बढ़ती नशाखोरी को रोकने के लिए विशेष जागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए। स्कूलों और मोहल्लों में नशे के दुष्परिणामों पर चर्चा और परामर्श कार्यक्रम आयोजित किए जाने की जरूरत है।

स्थानीय निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या सामाजिक संकट का रूप ले सकती है। बच्चों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए प्रशासन से त्वरित और प्रभावी हस्तक्षेप की अपेक्षा की जा रही है।
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