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  • 2026-02-16

Rajyasabha Elections: क्या राज्यसभा जाएंगी अंजनी सोरेन? गुरुजी की विरासत और सोरेन परिवार की संसद में वापसी की तैयारी

Rajyasabha Elections: झारखंड में राज्यसभा की दो रिक्त होने वाली सीटों को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। इन सीटों के लिए होने वाले द्विवार्षिक चुनाव ने सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों के बीच हलचल बढ़ा दी है। पहली सीट पिछले वर्ष 4 अगस्त को दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन के बाद से खाली पड़ी है, जबकि दूसरी सीट भाजपा के दीपक प्रकाश का कार्यकाल पूरा होने पर रिक्त होने वाली है। वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में दोनों सीटों पर सत्तारूढ़ गठबंधन का पलड़ा भारी नजर आ रहा है।


सोरेन परिवार की संसद में वापसी की तैयारी

झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के गलियारों में इस समय सबसे अधिक चर्चा अंजनी सोरेन के नाम की है। पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं का एक बड़ा वर्ग चाहता है कि शिबू सोरेन की पुत्री अंजनी सोरेन को राज्यसभा भेजा जाए। गुरुजी के निधन के बाद यह पहली बार है जब सोरेन परिवार का कोई सदस्य संसद के किसी भी सदन में मौजूद नहीं है। पार्टी नेताओं का मानना है कि सोरेन परिवार का संसद में प्रतिनिधित्व न केवल भावनात्मक रूप से जरूरी है, बल्कि यह कार्यकर्ताओं के मनोबल के लिए भी महत्वपूर्ण है।

ओडिशा में संगठन का चेहरा रही हैं अंजनी
शिबू सोरेन और रूपी सोरेन की बेटी अंजनी सोरेन विवाह के बाद से ही ओडिशा के मयूरभंज क्षेत्र में जेएमएम की जड़ें मजबूत करने में सक्रिय रही हैं। हालांकि 2019 और 2024 के ओडिशा विधानसभा व लोकसभा चुनावों में उन्हें सफलता नहीं मिली, लेकिन उनके नेतृत्व में पार्टी को मिलने वाले मतों में वृद्धि दर्ज की गई है। जेएमएम के वरिष्ठ नेताओं का तर्क है कि अंजनी सोरेन को राज्यसभा भेजने से न केवल झारखंड बल्कि पड़ोसी राज्य ओडिशा में भी आदिवासी समाज के बीच सकारात्मक संदेश जाएगा।

विधानसभा का संख्या बल और गठबंधन की स्थिति
81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में वर्तमान गणित को देखें तो सत्तारूढ़ गठबंधन की स्थिति काफी मजबूत है। जेएमएम के पास 34, कांग्रेस के 16, राजद के 4 और सीपीआई (माले) के 2 विधायक हैं। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए प्रथम वरीयता के 27 वोटों की आवश्यकता होती है। ऐसे में गठबंधन के पास आसानी से दोनों सीटें जीतने का संख्या बल मौजूद है। दूसरी ओर, विपक्षी दल भाजपा के लिए इस बार झारखंड से किसी सदस्य को उच्च सदन भेजने की राह बेहद कठिन नजर आ रही है।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन लेंगे अंतिम निर्णय
हालांकि पार्टी के भीतर अंजनी सोरेन के नाम को लेकर भारी समर्थन है, लेकिन अंतिम मुहर पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लगानी है। अभी यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि जेएमएम दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी या गठबंधन धर्म निभाते हुए एक सीट कांग्रेस के साथ साझा करेगी। बहरहाल, जेएमएम के भीतर उम्मीदवारों के चयन को लेकर मंथन का दौर अंतिम चरण में है।

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