दरअसल, पलामू के पांकी
थाना इलाके के द्वारिका के रघुआखाड़ में महाशिवरात्रि के दौरान मेला लगा था.
रविवार को मेले में बच्चों ने गोलगप्पा खाया था. गोलगप्पा खाने के बाद रविवार रात
को एक-एक करके बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी. सोमवार सुबह कई बच्चों की हालत और
बिगड़ गई.
सुबह तक 25 बच्चे बीमार, शाम तक संख्या 150 के पार
सुबह तक करीब 25
बच्चे बीमार
पड़ गए. गांव वालों ने इसकी सूचना पांकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को दी,
जिसके बाद
स्वास्थ्य विभाग की टीम तुरंत हरकत में आई. स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारिका गांव
पहुंची. सोमवार शाम तक बीमार बच्चों की संख्या 150 से ज्यादा हो गई. बीमार
बच्चे द्वारिका और आस-पास के तीन-चार गांवों के हैं. बच्चों के बीमार पड़ने के बाद
बड़ी संख्या में गांव वाले अस्पताल पहुंचे.
पांकी के
द्वारिका के रहने वाले ध्रुव कुमार गुप्ता ने बताया कि उनके बेटे ने भी मेले में
गोलगप्पा खाया था, जिसके बाद वह बीमार पड़ गया. स्थानीय स्तर पर बच्चे का इलाज
कराया गया. मेले में गोलगप्पा खाने के बाद गांव के कई और बच्चे भी बीमार पड़ गए.
पलामू के सिविल
सर्जन डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि बीमार बच्चों की संख्या 150 से अधिक है.
उनकी हालत खतरे से बाहर है. कई बच्चों को दवा देने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी
गई है. पांकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी महेंद्र प्रसाद ने बताया कि
सभी बच्चे खतरे से बाहर हैं और उनकी सेहत पर नजर रखी जा रही है. बच्चों को उल्टी
और दस्त की शिकायत थी. इस मामले की जांच भी की जा रही है.
बच्चों के इलाज के लिए नहीं थी एंबुलेंस, गांव वालों ने
की मदद
जब बच्चे बीमार
होने लगे गांव वाले घबरा गए. बीमार बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही थी. सामुदायिक
स्वास्थ्य केंद्र में सिर्फ दो एंबुलेंस ही उपलब्ध थीं. जिस गांव में बच्चों को
फूड पॉइजनिंग हुई, वह स्वास्थ्य केंद्र से करीब 12 से 15 किलोमीटर दूर
है. हालात को देखते हुए, स्थानीय गांव वालों ने मदद का हाथ बढ़ाया और कई बच्चों को
इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया. पांकी पश्चिमी के मुखिया नेहाल अंसारी ने अपनी निजी
गाड़ी से दर्जनों बच्चों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया.