Holi Special Train: होली 2026 के अवसर पर यात्रियों की भारी भीड़ को देखते हुए दक्षिण पूर्व रेलवे ने टाटानगर से कटिहार के बीच होली स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है. इस फैसले से लौहनगरी में रहकर काम करने वाले बिहार के हजारों रेल यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी. विशेष रूप से बरौनी, बेगूसराय, खगड़िया और मानसी जैसे प्रमुख स्टेशनों की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए यह सेवा वरदान साबित होगी.
मार्च महीने में कुल पांच फेरे लगाएगी ट्रेन
रेलवे प्रशासन द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, ट्रेन संख्या 08181/08182 टाटा-कटिहार होली स्पेशल का परिचालन 2 मार्च से शुरू होकर 31 मार्च तक जारी रहेगा. कुल 22 कोच वाली यह ट्रेन पूरे महीने में पांच फेरे लगाएगी. त्योहार के समय नियमित ट्रेनों में लंबी वेटिंग लिस्ट और टिकटों की मारामारी को देखते हुए इस स्पेशल ट्रेन में सीटों की संख्या पर्याप्त रखी गई है, जिससे औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत श्रमिकों को अपने घर लौटने में आसानी होगी.
ये रहेगी समय सारणी और रूट
ट्रेन संख्या 08181 टाटानगर से प्रत्येक सोमवार को दोपहर 1:00 बजे रवाना होगी और अगले दिन सुबह 7:30 बजे कटिहार पहुंचेगी. वहीं वापसी में ट्रेन संख्या 08182 कटिहार से हर मंगलवार सुबह 10:30 बजे प्रस्थान करेगी और बुधवार तड़के 4:30 बजे टाटानगर वापस आएगी. यह ट्रेन अपने रूट पर बरौनी, खगड़िया और बेगूसराय जैसे महत्वपूर्ण स्टेशनों पर रुकेगी, जिससे मध्य और उत्तर बिहार की कनेक्टिविटी मजबूत होगी.
बिहार जाने वाले श्रमिकों के लिए सुगम होगी यात्रा
टाटानगर और आदित्यपुर के औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों का एक बड़ा हिस्सा बिहार से ताल्लुक रखता है. होली पर इन कामगारों के पलायन के कारण नियमित ट्रेनों पर दबाव काफी बढ़ जाता है. रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे समय रहते अपना आरक्षण करा लें ताकि अंतिम समय में होने वाली अफरा-तफरी से बचा जा सके. स्पेशल कोचों की संख्या अधिक होने से इस बार कन्फर्म टिकट मिलने की संभावना भी बढ़ गई है.
त्योहारों के दौरान रेलवे द्वारा “स्पेशल ट्रेनों” का संचालन केवल एक सुविधा नहीं बल्कि भीड़ प्रबंधन की एक अनिवार्य रणनीति है. टाटानगर-कटिहार मार्ग पर यह ट्रेन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह झारखंड के औद्योगिक बेल्ट को सीधे बिहार के उन जिलों से जोड़ती है जहां से सबसे अधिक श्रमिक पलायन करते हैं. हालांकि, पांच फेरे यात्रियों की भारी संख्या को देखते हुए कम लग सकते हैं, लेकिन 22 कोचों की क्षमता इस दबाव को काफी हद तक संतुलित करने में सक्षम होगी.