सुरक्षा के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सहारा
बैठक में तकनीक के इस्तेमाल पर सबसे बड़ा फैसला लिया गया। अब कंपनी के सेफ्टी लेंस एप्लीकेशन को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से संचालित किया जाएगा। इससे सुरक्षा की निगरानी तकनीकी रूप से अधिक सटीक और साउंड हो सकेगी। साथ ही, रेड रिस्क अत्यधिक जोखिम वाले क्षेत्र की पहचान और समाधान में तेजी आएगी।
प्रक्रियाओं का सरलीकरण, वर्क परमिट और गेट पास
कर्मचारियों और वेंडरों को राहत देते हुए प्रबंधन ने प्रक्रियाओं को पेपरलेस और तेज बनाने का निर्णय लिया है अब महज 5 मिनट के भीतर वर्क परमिट बन जाएगा।
गेट पास बनने की जटिल प्रक्रिया, जिसमें पहले 26 दिन लगते थे, उसे घटाकर अब 2 से 4 दिन कर दिया गया है। ट्रेनिंग के लिए टोयोटा मॉडल और सिमुलेटर टाटा स्टील ने सुरक्षा प्रशिक्षण के लिए जापानी कंपनी टोयोटा से सीख लेते हुए जमशेदपुर प्लांट में छह अत्याधुनिक सिमुलेटर स्थापित किए हैं। इनके जरिए कर्मचारियों को वास्तविक कार्यस्थल पर जाने से पहले आभासी परिस्थितियों में ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि दुर्घटनाओं की गुंजाइश खत्म हो सके।
नियमों में बदलाव और डेडलाइन
एमडी टीवी नरेंद्रन ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा मानकों को बोझिल बनाने के बजाय प्रभावी बनाया जाएगा। इसके तहत, सेफ्टी के 90 स्टैंडर्ड्स को घटाकर अब केवल 23 प्रमुख मानकों में समेटा जाएगा। वेंडर स्टार रेटिंग असेसमेंट के नियमों में भी बदलाव होगा। ये सभी नए नियम फरवरी से मार्च 2026 तक पूरी तरह लागू कर दिए जाएंगे। बैठक में टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष संजीव चौधरी टुन्नु, यूनियन के अन्य प्रतिनिधि और प्रबंधन के आला अधिकारी मौजूद थे। यूनियन अध्यक्ष ने भी काउंसिल को अधिक सक्रिय और मजबूत बनाने के सुझाव दिए।