Chandil News: सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल क्षेत्र से एक झकझोर देने वाली खबर सामने आई है, जिसने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं. कुकडू प्रखंड में पदस्थापित नाजीर तापस सरकार की अचानक हुई मौत ने यह साबित कर दिया है कि आपात स्थिति में सरकारी सिस्टम किस कदर लाचार है. बुधवार की सुबह जब वे सरकारी काम से सरायकेला जा रहे थे, तभी अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी और वे सड़क पर गिर पड़े.
जब सरकारी मुलाजिम को ही नहीं मिला सहारा
हैरानी की बात यह है कि घटना के बाद स्थानीय लोगों ने तुरंत सरकारी एम्बुलेंस के लिए संपर्क किया, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी. तड़पते हुए तापस सरकार को आनन-फानन में निजी वाहन के जरिए पातकुम स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ईचागढ़ ले जाया गया. हालांकि, अस्पताल पहुंचने तक काफी देर हो चुकी थी और वहां मौजूद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.
जनता में भारी आक्रोश और उठते सवाल
इस हृदयविदारक घटना के बाद स्थानीय नागरिकों और सहकर्मियों में गहरा रोष है. लोगों का कहना है कि जब ड्यूटी पर तैनात एक सरकारी कर्मी को ही वक्त पर एम्बुलेंस नहीं मिल पा रही, तो आम जनता का भगवान ही मालिक है. सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और एम्बुलेंस सेवाओं की उपलब्धता पर तीखे सवाल उठ रहे हैं. स्थानीय लोगों ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है ताकि भविष्य में किसी और की जान इस तरह सिस्टम की लापरवाही से न जाए.
यह घटना केवल एक कर्मचारी की मौत नहीं, बल्कि स्वास्थ्य विभाग के “रिस्पॉन्स टाइम” की विफलता का प्रमाण है. अक्सर कागजों पर एम्बुलेंस और आपातकालीन सेवाओं के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत चांडिल जैसी घटनाओं में उजागर हो जाती है. यदि समय पर एम्बुलेंस मिल जाती, तो शायद एक जान बचाई जा सकती थी. यह मामला सरकार के लिए एक वेक-अप कॉल है कि बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार केवल फाइलों तक सीमित न रहकर धरातल पर भी नजर आना चाहिए.