स्मृतियों की रोशनी में लालटेन
टाटा स्टील के कॉर्पोरेट सर्विसेज में हेड के पद पर कार्यरत निशीथ सिन्हा ने अपनी इस पुस्तक को अपने माता-पिता को समर्पित किया है। उन्होंने भावुक होते हुए बताया कि पुस्तक का नाम लालटेन उनकी माँ की स्मृति में रखा गया है। उन्होंने याद किया कि कैसे बिजली के अभाव में भी उनकी माँ लालटेन जलाकर उन्हें पढ़ने की प्रेरणा देती थीं। यह संग्रह २१ कविताओं का संकलन है, जो आत्म-बोध और जीवन के गहरे अनुभवों को समेटे हुए है।
दिग्गजों ने सजाई काव्य महफिल
कार्यक्रम के दौरान डॉ. रागिनी भूषण, डॉ. जूही समर्पिता और संगीता सिन्हा ने संयुक्त रूप से पुस्तक का लोकार्पण किया। समारोह में शहर के प्रबुद्ध रचनाकारों ने अपनी कविताओं से समां बांध दिया। काव्य पाठ करने वालों में प्रमुख रूप से शामिल थे विद्या तिवारी, डॉ. आशा गुप्ता और ज्योत्सना अस्थाना सरिता सिंह, डॉ. संध्या सिन्हा और सुधा गोयल ममता कर्ण, छाया प्रसाद और भारती कुमार, आलोक मंजरी, वंदना, डॉ. रागिनी भूषण एवं निशीथ सिन्हा ।
साहित्यिक यात्रा और समीक्षा
डॉ. रागिनी भूषण ने लालटेन की समीक्षा करते हुए इसकी मौलिकता की सराहना की और लेखक को भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। उल्लेखनीय है कि निशीथ सिन्हा के दो संग्रह दिल जो भी कहेगा और छोटी सी आशा पहले ही चर्चा बटोर चुके हैं। उनकी यह नई कृति अब अमेज़न पर भी पाठकों के लिए उपलब्ध है। कार्यक्रम का समापन डॉ. जूही समर्पिता द्वारा दिए गए धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। यह शाम साहित्य प्रेमियों के लिए स्मृतियों और शब्दों के अनूठे संगम के रूप में याद रखी जाएगी।