Jharkhand News: पति-पत्नी के पवित्र रिश्ते को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने एक नजीर पेश करने वाला फैसला सुनाया है. अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि केवल संदेह या मामूली आरोपों को आधार बनाकर वैवाहिक संबंध को खत्म नहीं किया जा सकता. मामला गोड्डा के एक दंपति से जुड़ा है, जिसमें पति ने अपनी पत्नी पर अवैध संबंध का आरोप लगाते हुए तलाक की गुहार लगाई थी. हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति अरुण कुमार राय की खंडपीठ ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए पति की अपील खारिज कर दी.
सबूतों के बिना आरोप बेमानी
अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि पति ने अपनी पत्नी पर किसी अन्य व्यक्ति के साथ संबंध होने के जो गंभीर आरोप लगाए थे, उनके समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किए गए. न तो कोई कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) दी गई और न ही किसी ऐसी विशेष घटना का जिक्र किया गया जिससे आरोपों की पुष्टि हो सके. कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि अवैध संबंध जैसे संवेदनशील आरोप लगाने के लिए मजबूत साक्ष्यों की जरूरत होती है, महज कह देने भर से इसे सच नहीं माना जा सकता.
छोटा-मोटा झगड़ा क्रूरता नहीं
खंडपीठ ने वैवाहिक जीवन की बारीकियों पर गौर करते हुए कहा कि घरों में होने वाले सामान्य मतभेद या मामूली कहासुनी को “क्रूरता” की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता. बता दें कि इस दंपति की शादी साल 2011 में हुई थी और उनके दो बच्चे भी हैं. पति का दावा था कि उसकी पत्नी 2021 में जेवर और नगदी लेकर घर छोड़कर चली गई थी. इससे पहले गोड्डा की परिवार अदालत ने भी 15 अक्टूबर 2022 को इन्ही आधारों पर तलाक देने से इनकार कर दिया था, जिसे अब हाईकोर्ट ने भी सही ठहराया है.
हाईकोर्ट का यह फैसला समाज में बढ़ते तलाक के मामलों और बिना आधार के लगाए जाने वाले चरित्र हनन के आरोपों पर एक कानूनी लगाम है. अक्सर देखा जाता है कि आपसी विवादों में “अवैध संबंध” को हथियार बनाया जाता है, लेकिन अदालत ने साफ कर दिया कि कानून भावनाओं या शक पर नहीं, बल्कि पुख्ता सबूतों पर चलता है. यह निर्णय उन परिवारों के लिए भी राहत भरा है जो छोटी-मोटी गलतफहमियों के कारण टूटने की कगार पर पहुंच जाते हैं.