Jharkhand News: झारखंड विधानसभा बजट सत्र के तीसरे दिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विपक्ष पर कड़ा प्रहार किया. सदन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की जरूरतें और जनता की इच्छाएं अनंत हैं, जिन्हें उनकी सरकार पूरी मजबूती से पूरा कर रही है. विपक्ष की खाली कुर्सियों पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि पहली बार ऐसा हुआ है कि राज्यपाल के अभिभाषण पर कोई संशोधन नहीं आया, जो यह साबित करता है कि अब विपक्ष भी अंदर ही अंदर सरकार की उपलब्धियों को स्वीकार करने लगा है.
बबूल और आम के उदाहरण से घेरा
मुख्यमंत्री ने विपक्ष के पिछले कामकाज पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर आप पेड़ बबूल का लगाएंगे तो आम की उम्मीद कैसे कर सकते हैं? उन्होंने कहा कि पूर्व की सरकारों ने केवल कांटे बोने का काम किया, जबकि वर्तमान सरकार हर वर्ग तक योजनाओं का लाभ पहुंचा रही है. सीएम ने दावा किया कि पहले झारखंड दूसरे राज्यों के मॉडल को अपनाता था, लेकिन आज स्थिति बदल गई है और दूसरे राज्य झारखंड की योजनाओं की नकल कर रहे हैं. उन्होंने साफ कहा कि झारखंड को 2050 तक देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने का लक्ष्य तय कर लिया गया है.
डबल इंजन और वैश्विक मुद्दों पर प्रहार
हेमंत सोरेन ने केंद्र और अन्य राज्यों की राजनीति पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जहां-जहां डबल इंजन की सरकारें हैं, वे जल्द ही धराशायी हो जाएंगी. उन्होंने फर्जी एआई (AI) समिट और देश के आर्थिक हालात पर चिंता जताते हुए कहा कि आज पूरा देश कर्ज में डूबा है. उन्होंने किसानों की आत्महत्या और मणिपुर की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि आज देश में अजनबी जैसा माहौल बना दिया गया है. सीएम ने आरोप लगाया कि सत्ता के लिए हिंदू-मुस्लिम के बीच जहर का समंदर तैयार कर इंसानियत को तार-तार किया गया है.
विपक्ष की घबराहट और मजबूत संकल्प
अपने संबोधन के अंत में सीएम ने कहा कि सरकार के कामों से विपक्ष इस कदर घबराया हुआ है कि उन्हें डर है कि कहीं यह घबराहट हार्ट अटैक में न बदल जाए. उन्होंने केंद्र के साथ राज्य के रिश्तों और सीमित संसाधनों का जिक्र करते हुए कहा कि अगर नीयत साफ हो और संकल्प मजबूत हो, तो हर असंभव काम को संभव बनाया जा सकता है. उन्होंने जोर देकर कहा कि झारखंड की सरकार गांवों से चलने वाली सरकार है और जो विकास की लकीर उन्होंने खींच दी है, उसे मिटाना अब किसी के बस की बात नहीं.
मुख्यमंत्री का यह भाषण पूरी तरह से आक्रामक और राजनीतिक संदेशों से भरा रहा. उन्होंने न केवल स्थानीय मुद्दों बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक नीतियों पर भी अपनी बात रखी. बबूल और आम के मुहावरे के जरिए उन्होंने सीधे तौर पर पिछले शासन की विफलताओं को वर्तमान की उपलब्धियों से जोड़ा.