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  • 2026-02-21

Jharkhand Legislative Assembly: झारखंड विधानसभा बजट सत्र में सरकार–विपक्ष में नोकझोंक, विकास कार्यों और आर्थिक सर्वेक्षण पर हुई चर्चा

रांची: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के चौथे दिन सदन में सरकार के कामकाज, विपक्ष की भूमिका, विकास योजनाओं की स्थिति और वित्तीय प्रबंधन को लेकर तीखी लेकिन रचनात्मक बहस देखने को मिली।

मुख्यमंत्री की सक्रियता से "नामुमकिन भी मुमकिन" उदय शंकर सिंह
सत्र के दौरान विधायक उदय शंकर सिंह ने कहा कि जब मुख्यमंत्री किसी कार्य को ठान लेते हैं और पूरी ताकत से लग जाते हैं, तो नामुमकिन काम भी मुमकिन हो जाता है। उनके अनुसार मुख्यमंत्री की सक्रियता से राज्य के कार्यों में स्वतः तेजी आ जाती है।

उन्होंने सदन में केंद्र सरकार की आलोचना किए जाने का भी जिक्र किया और कहा कि कुछ वक्ता आलोचना को अपना फर्ज मानते हैं। साथ ही उन्होंने सदस्यों को सुझाव दिया कि काम में थोड़ी देर हो जाए तो भी चलेगा, लेकिन कार्य सही और दुरुस्त होना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि फिलहाल कामकाज में अपेक्षित सुधार नजर नहीं आ रहा है।
विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी संख्या ही बता रही है कि वे अब प्रभावी नहीं रह गए हैं। अंत में उन्होंने अपनी बात संक्षेप में समाप्त की।

विधायकों के लिए "बजट की समझ" पर कार्यशाला
झारखंड विधानसभा सचिवालय के प्रशासनिक कक्ष में सभी विधायकों के लिए "बजट की समझ (Understanding of Budget)" विषय पर एक महत्वपूर्ण कार्यशाला आयोजित की जा रही है। इसका आयोजन लेजिसलेटिव रिसर्च द्वारा किया जाएगा।

घोषणा के अनुसार, यह कार्यशाला सदन की कार्यवाही समाप्त होते ही शुरू होगी। सभी विधायकों को इसमें आमंत्रित किया गया है, विशेषकर उन सदस्यों को जो बजट के विभिन्न पहलुओं का गहन अध्ययन करना चाहते हैं।

“हम शत्रु नहीं, विचारधारा के आधार पर विरोध”
द्वितीय अनुपूरक कटौती प्रस्ताव पर चर्चा की शुरुआत करते हुए वक्ताओं ने कहा कि सत्ता और विपक्ष शत्रु नहीं हैं। नीतियों और विचारधारा के आधार पर विरोध होता है, लेकिन विकास के मुद्दों पर सभी को एकजुट होना चाहिए।

सरकारी व्यवस्थाओं पर नीरा यादव के सवाल
विधायक नीरा यादव ने विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली और जमीनी हकीकत पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि केरल के अंचल कार्यालयों में समय पर काम होने से भीड़ नहीं लगती, जबकि झारखंड में अव्यवस्था दिखती है।

उन्होंने ओडिशा के सर्किट हाउस की व्यवस्था की सराहना करते हुए पलामू सर्किट हाउस की खराब स्थिति का उल्लेख किया, जहां दरवाजे की चिटकनी और नल टूटे हुए मिले।

नीरा यादव ने आरोप लगाया कि कई योजनाओं में अनुपयोगी खर्च हो रहा है, जबकि विधायकों द्वारा सुझाई गई योजनाओं को प्राथमिकता नहीं दी जाती। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि मार्च माह के दबाव में अधिकारी कहीं भी राशि खर्च तो नहीं कर रहे।

जनप्रतिनिधियों की अनदेखी का आरोप
भूमि संरक्षण विभाग द्वारा ट्रैक्टर एवं अन्य उपकरणों के वितरण कार्यक्रम में विधायकों को आमंत्रित नहीं किए जाने पर भी नाराजगी जताई गई। आरोप लगाया गया कि अधिकारी स्वयं उद्घाटन और अनावरण कर रहे हैं, जबकि स्थानीय जनप्रतिनिधियों को सूचना तक नहीं दी जाती।

स्वास्थ्य, शिक्षा और आधारभूत संरचना पर चिंता
नीरा यादव ने कहा कि करमा स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण अधूरा है, जबकि सरकार की ओर से अप्रैल तक काम पूरा होने का दावा किया गया है। उन्होंने इसे भ्रामक जवाब बताया।

उन्होंने राज्य की वित्तीय स्थिति पर भी चिंता जताते हुए कहा कि कर्ज लेकर सरकार काम चला रही है, जिससे भविष्य में बोझ बढ़ सकता है।

शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि स्कूलों में पढ़ाई और मध्याह्न भोजन दोनों प्रभावित हैं। विकास मद की राशि समय पर नहीं पहुंच रही और बुनियादी सुविधाओं का अभाव है।

महिला डिग्री कॉलेजों और मेडिकल कॉलेजों में शैक्षणिक गतिविधियां शुरू न होने पर भी उन्होंने रिपोर्ट लेकर कार्रवाई की मांग की। श्यामा प्रसाद विश्वविद्यालय में शिक्षकों और पुस्तकालय की कमी का मुद्दा भी उठाया गया।

पेयजल और सड़क सुरक्षा का मुद्दा
घर-घर जलापूर्ति योजना के तहत पाइपलाइन और टंकी तो बनी है, लेकिन कई स्थानों पर नल टूटे हुए हैं। सड़क किनारे सूखे पेड़ों से दुर्घटना की आशंका जताते हुए कोडरमा-डोमचांच रोड पर कार्रवाई की मांग की गई। किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।

वित्तीय वर्ष 2025-26 का आर्थिक सर्वेक्षण पेश
सत्र के दौरान वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने वित्तीय वर्ष 2025-26 का आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट सदन में पेश किया। रिपोर्ट में राज्य की वित्तीय स्थिति, प्रगति और विभिन्न विभागों द्वारा किए गए विकास कार्यों का विस्तृत ब्योरा दिया गया है।

वित्तीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (FRBM) अधिनियम लागू होने के बाद आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत करना अनिवार्य है।

बजट सत्र के चौथे दिन सदन में सरकार की उपलब्धियों, प्रशासनिक खामियों, वित्तीय अनुशासन और विकास कार्यों को लेकर गंभीर चर्चा हुई। सत्ता और विपक्ष दोनों ने अपनी-अपनी बात रखी और राज्य के समग्र विकास पर जोर दिया।
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