Jharkhand Vidhansabha: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र का पांचवां दिन राज्य की बुनियादी समस्याओं को लेकर जमकर हंगामा हो रहा है. प्रश्नकाल के दौरान जहां दामोदर नदी के अस्तित्व पर मंडराते खतरे को लेकर सरकार ने सख्त तेवर दिखाए, वहीं स्कूलों में बढ़ते ड्रॉपआउट रेट और बीपीएल नामांकन में कथित धांधली को लेकर विपक्ष ने सरकार को जमकर घेरा. विधायक सरयू राय ने दामोदर नदी में बढ़ते औद्योगिक प्रदूषण का मामला उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा. इस पर विभाग ने स्वीकार किया कि जांच में नियमों की अनदेखी पाई गई है और प्रदूषण मानकों का उल्लंघन करने पर चंद्रपुरा ताप बिजली घर पर भारी जुर्माना लगाया गया है. तीन सदस्यीय टीम ने पाया कि प्रदूषण रोकने वाली दीवार नियमों के मुताबिक नहीं थी. मंत्री ने सदन में यह सनसनीखेज खुलासा भी किया कि जांच के दौरान सबूत मिटाने का प्रयास हुआ, लेकिन अब विभाग द्वारा हर महीने नदी के पानी की मॉनिटरिंग की जा रही है.
लॉटरी सिस्टम होने के बावजूद एक विशेष वर्ग का चयन 75 प्रतिशत तक कैसे: नीरा यादव
बीपीएल नामांकन के मुद्दे पर विधायक नीरा यादव ने निजी स्कूलों में आरक्षित सीटों पर होने वाले दाखिलों पर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने पूछा कि लॉटरी सिस्टम होने के बावजूद एक विशेष वर्ग का चयन 75 प्रतिशत तक कैसे पहुंच रहा है और आरोप लगाया कि सिफारिश के आधार पर एडमिशन होने से सिस्टम की साख गिर रही है. इसके जवाब में मंत्री ने कहा कि चयन प्रक्रिया मैनेजमेंट और अभिभावकों की मौजूदगी में पारदर्शी तरीके से होती है, हालांकि उन्होंने आश्वासन दिया कि किसी भी विशिष्ट शिकायत पर सरकार कड़ी कार्रवाई करेगी. वहीं, सदन में सबसे चौंकाने वाले आंकड़े विधायक हेमलाल मुर्मू ने पेश किए, जिसमें उन्होंने बताया कि झारखंड में माध्यमिक शिक्षा तक पहुंचते-पहुंचते नामांकन का अनुपात घटकर महज 60.6% रह जाता है. इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने गहरी चिंता जताते हुए कहा कि 50 प्रतिशत से अधिक का ड्रॉपआउट रेट राज्य के भविष्य के लिए खतरे की घंटी है, हालांकि मंत्री सुदिव्य कुमार ने इन आंकड़ों के स्रोत पर सवाल उठाते हुए शिक्षा के ग्राफ में वृद्धि का दावा किया.
संसाधनों के अभाव में गरीब बच्चे भारी फीस देने को मजबूर
हेमलाल मुर्मू ने संताल परगना के मिशन स्कूलों का मुद्दा उठाते हुए मांग की कि वहां पढ़ने वाले गरीब बच्चों को भी सरकारी साइकिल और पोशाक जैसी योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए. उन्होंने कहा कि संसाधनों के अभाव में गरीब बच्चे भारी फीस देने को मजबूर हैं. इस पर मंत्री ने स्वीकार किया कि अल्पसंख्यक स्कूलों को वर्तमान में सरकारी लाभ कम मिलते हैं और उन्होंने भरोसा दिलाया कि इन स्कूलों को सरकारी योजनाओं के दायरे में लाने के प्रस्ताव पर सरकार गंभीरता से विचार करेगी.
बजट सत्र की यह कार्यवाही बता रही है कि झारखंड में विकास की दावों और धरातल की हकीकत के बीच एक बड़ी खाई मौजूद है. एक ओर सरकार भारी-भरकम बजट पेश कर रही है, तो दूसरी ओर स्कूलों में बच्चों का न टिकना और जीवनदायिनी नदियों का प्रदूषित होना प्रशासनिक तंत्र की शिथिलता को उजागर करता है. दामोदर नदी मामले में जुर्माना लगाना एक सकारात्मक कदम है, लेकिन शिक्षा और ड्रॉपआउट जैसे संवेदनशील विषयों पर आंकड़ों की बाजीगरी के बजाय ठोस धरातलीय सुधार की आवश्यकता है.