Jamshedpur : नेशनल ह्यूमन राइट्स एंड क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (NHRCCB) के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव एवं ‘नेशनल लीडरशिप अवार्ड’ से सम्मानित जमशेदपुर निवासी विनय कुमार चंद्र ने आईजीआई एयरपोर्ट पर तैनात कस्टम्स अधिकारियों के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। उनकी कानूनी पहल के बाद विभाग को अपनी अपील रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को स्वीकार करना पड़ा है।
सीसीटीवी न होने की स्वीकारोक्ति
विनय चंद्र द्वारा उठाए गए सवालों के बाद विभाग को लिखित रूप में यह स्वीकार करना पड़ा कि एआईयू (AIU) कार्यालय के भीतर सीसीटीवी कैमरे उपलब्ध नहीं हैं। इसे सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी चूक माना जा रहा है। श्री चंद्र का आरोप है कि सीसीटीवी की अनुपस्थिति में यात्रियों के साथ मनमानी और उत्पीड़न की आशंका बढ़ जाती है।
अवैध हिरासत के आरोप पर आंतरिक जांच
विनय चंद्र ने ‘डार्क रूम’ में अवैध हिरासत और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए थे। इन आरोपों के बाद विभाग ने आंतरिक जांच शुरू करने की बात कही है। इसे उनकी कानूनी दृढ़ता का परिणाम बताया जा रहा है।
समान तिथि के इनवॉइस पर आपत्ति को बताया निराधार
मामले के दौरान अधिकारियों ने समान तिथि के इनवॉइस पर आपत्ति जताई थी, जिसे विनय चंद्र ने मौके पर ही कानूनी तर्कों से चुनौती दी। उनका कहना है कि पूरी प्रक्रिया अनावश्यक दबाव बनाने और प्रताड़ित करने की मंशा से की गई।
85 मिनट की प्रताड़ना, फिर भी नहीं झुके
बताया गया कि करीब 85 मिनट तक चली पूछताछ और फ्लाइट छूटने के जोखिम के बावजूद श्री चंद्र ने अपने अधिकारों से समझौता नहीं किया। उन्होंने कहा कि कानून और मानवाधिकारों की रक्षा किसी भी व्यक्तिगत डर से ऊपर है।
संगठन का बयान
नेशनल ह्यूमन राइट्स एंड क्राइम कंट्रोल ब्यूरो के मीडिया अधिकारी ने कहा कि यह लड़ाई केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि हर उस अंतरराष्ट्रीय यात्री की है जो व्यवस्था की खामियों से प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि श्री विनय कुमार चंद्र ने यह दिखाया है कि सजग नागरिक अपने अधिकारों के लिए खड़ा हो सकता है।
मामले के सामने आने के बाद एयरपोर्ट कस्टम्स की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर बहस तेज हो गई है।