आज 2 मार्च 2026 को चंद्रग्रहण लग रहा है। ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं में ग्रहण को विशेष घटना माना जाता है। चंद्रग्रहण तब लगता है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा एक सीध में आ जाते हैं और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। वहीं, ज्योतिष के अनुसार जब राहु चंद्रमा को खा लेता है तब ग्रहण लगता है। ग्रहण के कुछ समय पहले से ही सूतक काल भी आरंभ हो जाता है। ऐसे में सूतक काल से लेकर ग्रहण तक खाने-पीने की मनाही होती है। ऐसे में लोग सूतक काल के दौरान ही खाने पीने की चीजों में तुलसी डालकर रख देते हैं। तुलसी को हिंदू धर्म में पवित्र माना जाता है। ऐसे में ग्रहण के दौरान भी खाना दूषित नहीं होता है। ऐसे में सवाल उठता है कि ग्रहण खत्म होने के बाद उस तुलसी का क्या करना चाहिए?
ग्रहण खत्म होने के बाद तुलसी का क्या करें?
मान्यता यह है कि ग्रहण समाप्त होने के बाद तुलसी के पत्तों को भोजन से अलग निकालकर फेंकने की जरूरत नहीं होती। वे भोजन के साथ ही रह सकते हैं। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान कर, पूजा-पाठ करके उस भोजन का सेवन किया जा सकता है। तुलसी के पत्ते भी उसी भोजन के साथ खाए जा सकते हैं, क्योंकि उन्हें ‘रक्षा कवच’ की तरह माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि तुलसी ने ग्रहण के दौरान भोजन को नकारात्मक प्रभाव से बचाया है, इसलिए उसका सेवन शुभ और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी समझा जाता है।
क्यों डाली जाती है तुलसी?
धार्मिक मान्यता है कि ग्रहण या सूतक काल के दौरान वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है। इस कारण पहले से बने भोजन को सुरक्षित रखने के लिए उसमें तुलसी के पत्ते डाल दिए जाते हैं। तुलसी को हिंदू धर्म में बेहद पवित्र पौधा माना गया है। आयुर्वेद में भी तुलसी को औषधीय गुणों से भरपूर बताया गया है। कहा जाता है कि तुलसी भोजन को दूषित होने से बचाती है और उसे शुद्ध बनाए रखती है। इसी वजह से ग्रहण से पहले ही खाने की चीजों में तुलसी के पत्ते डाल दिए जाते हैं, ताकि ग्रहण काल के दौरान भी भोजन सुरक्षित रहे।
तुलसी कब डालनी चाहिए?
परंपरा के अनुसार तुलसी के पत्ते सूतक शुरू होने से पहले ही तोड़कर भोजन में डालने चाहिए। सूतक काल के दौरान तुलसी के पौधे को छूना या पत्ते तोड़ना उचित नहीं माना जाता है। लोग ग्रहण लगने से पहले ही दाल, चावल, सब्जी, पानी या अन्य खाद्य पदार्थों में तुलसी के पत्ते डाल देते हैं। आज 3 मार्च को ग्रहण दोपहर 03:20 बजे से रात्रि 06:47 बजे तक रहेगा। ग्रहण से लगभग 9 घंटे पहले सूतक काल प्रारंभ हो जाएगा। हालांकि सूतक काल में तुलसी के पौधे को स्पर्श न करें। पत्ते पहले से तोड़कर रखें और ग्रहण से पहले ही भोजन में डालें। ग्रहण खत्म होने के बाद घर की सफाई और स्नान करना शुभ माना जाता है।
क्या ग्रहण के बाद पुराना भोजन खाना चाहिए?
धार्मिक नियमों के अनुसार, ग्रहण के समय ताजा भोजन नहीं बनाया जाता है। कई लोग ग्रहण से पहले बना हुआ भोजन ही रखते हैं और उसमें तुलसी डाल देते हैं। ग्रहण समाप्त होने के बाद घर की साफ-सफाई की जाती है, स्नान किया जाता है और फिर नया भोजन बनाया जाता है। हालांकि जिन खाने की चीजों में तुलसी डाली गई हो, उन्हें ग्रहण के बाद खाया जा सकता है। कुछ लोग एहतियात के तौर पर बहुत ज्यादा देर रखा हुआ खाना नहीं खाते और नया भोजन बनाना ही बेहतर समझते हैं।