Jharkhand News: झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में पानी का मुख्य सहारा माने जाने वाले चापाकल रखरखाव के अभाव में दम तोड़ रहे हैं. सरकारी आंकड़ों के अनुसार राज्य भर में कुल 2,74,551 चापाकल स्थापित हैं, जिनमें से केवल 1,98,145 ही चालू हालत में हैं. हैरान करने वाली बात यह है कि 76,299 चापाकल खराब पड़े हैं, जबकि पिछले साल मई में ही वित्त मंत्री ने इनकी मरम्मत के लिए 259 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि को मंजूरी दी थी. उस वक्त सभी जिलों के उपायुक्तों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे लेकिन महीनों बाद भी नतीजा सिफर ही नजर आ रहा है.
सर्वाधिक प्रभावित जिलों का विवरण
जिलों की स्थिति पर गौर करें तो बोकारो और गढ़वा में सबसे बुरा हाल है. बोकारो में सबसे अधिक 10,186 चापाकल खराब हैं, वहीं गढ़वा में 8,942 और देवघर में 5,729 चापाकल मरम्मत की बाट जोह रहे हैं. जामताड़ा में 4,647, गिरिडीह में 4,179, धनबाद में 4,142, खूंटी में 3,986 और दुमका में 3,891 चापाकल बेकार पड़े हैं. राजधानी रांची में भी 3,707 चापाकलों का खराब होना प्रशासन की सुस्ती को उजागर करता है.
अन्य जिलों में पेयजल उपकरणों की बदहाली
इसके अलावा पाकुड़ में 3,534, साहेबगंज में 2,166, पूर्वी सिंहभूम में 2,469 और सिमडेगा में 2,072 चापाकल ठप हैं. कमोबेश यही स्थिति अन्य जिलों की भी है, जहां हजारीबाग में 1,990, गोड्डा में 1,778 और पश्चिमी सिंहभूम में 1,447 चापाकल खराब हैं. चतरा में 1,439, गुमला में 975, लोहरदगा में 909 और लातेहार में 702 चापाकल मरम्मत न होने के कारण ग्रामीणों की प्यास नहीं बुझा पा रहे हैं. सरायकेला में 2,025, रामगढ़ में 2,113 और कोडरमा में 2,003 चापाकलों के खराब होने से आने वाले दिनों में पानी के लिए हाहाकार मचना तय है.