Jamshedpur: जमशेदपुर की रहने वाली दीप्ति खेमानी ने अपनी मजबूत इच्छाशक्ति और साहस के दम पर दुनिया के सबसे ऊंचे स्वतंत्र खड़े पर्वत माउंट किलिमंजारो की चोटी पर पहुंचकर शहर का नाम रोशन किया है। 53 वर्ष की उम्र में इस चुनौतीपूर्ण पर्वतारोहण को सफलतापूर्वक पूरा कर उन्होंने यह साबित कर दिया कि दृढ़ निश्चय और हौसले के साथ किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
दीप्ति खेमानी ने 27 फरवरी 2026 को सुबह करीब 7:45 बजे समुद्र तल से लगभग 5,895 मीटर की ऊंचाई पर स्थित उहुरू पीक पर पहुंचकर माउंट किलिमंजारो की चोटी को छुआ। इस उपलब्धि के लिए तंजानिया नेशनल पार्क्स की ओर से उन्हें आधिकारिक पर्वतारोहण प्रमाणपत्र भी प्रदान किया गया।
प्रेमलता अग्रवाल से मिली प्रेरणा
जमशेदपुर के सीएच एरिया की निवासी और दो बच्चों की मां दीप्ति खेमानी ने बताया कि उन्हें साहसिक गतिविधियों की ओर बढ़ने की प्रेरणा भारत की प्रसिद्ध पर्वतारोही प्रेमलता अग्रवाल से मिली। प्रेमलता अग्रवाल माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली भारत की सबसे उम्रदराज महिला पर्वतारोही हैं।
दीप्ति ने बताया कि शुरुआत में पर्वतारोहण उनके लिए केवल एक शौक था, लेकिन समय के साथ यह जुनून में बदल गया। इसी जुनून ने उन्हें दुनिया के प्रसिद्ध पर्वत माउंट किलिमंजारो को फतह करने का लक्ष्य तय करने के लिए प्रेरित किया।
कठिन परिस्थितियों के बीच पूरी की चुनौती
तंजानिया में स्थित माउंट किलिमंजारो दुनिया के लोकप्रिय ट्रेकिंग स्थलों में से एक माना जाता है। यहां की ऊंचाई, बदलता मौसम और कठिन भौगोलिक परिस्थितियां पर्वतारोहियों की शारीरिक क्षमता और मानसिक मजबूती की कड़ी परीक्षा लेती हैं। ऐसे में इस पर्वत पर चढ़ाई करना किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं माना जाता।
परिवार का मिला पूरा साथ
दीप्ति खेमानी ने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार को दिया। उन्होंने बताया कि उनके पति प्रकाश खेमानी, जो पेशे से व्यवसायी हैं, हमेशा उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते रहे। उनके बेटे ओजस्वी, बहू ईवा और बेटी विदुषी ने भी हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया। परिवार के सहयोग और विश्वास ने उन्हें अपने सपने को साकार करने की ताकत दी।
महिलाओं और मध्यम आयु वर्ग के लिए बनी प्रेरणा
53 वर्ष की उम्र में इस उपलब्धि को हासिल करने पर शहर के लोगों और साहसिक खेलों से जुड़े लोगों ने दीप्ति खेमानी की खूब सराहना की है। लोगों का कहना है कि माउंट किलिमंजारो जैसी प्रतिष्ठित चोटी पर चढ़ाई करना आसान नहीं होता। इसके लिए लंबी तैयारी, कठोर अभ्यास और मजबूत इच्छाशक्ति की जरूरत होती है।
दीप्ति खेमानी की यह सफलता खासकर महिलाओं और मध्यम आयु वर्ग के लोगों के लिए प्रेरणादायक है। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि अगर इरादे मजबूत हों तो उम्र कभी भी सपनों को पूरा करने में बाधा नहीं बनती।