Jharkhand News: पलामू में रिकॉर्ड बारिश के बाद भी मार्च से ही कोयल नदी का स्तर काफी निचे चला गया है और कई जगहों पर नदी में बस रेत दिखाई पड़ रही है। रिकार्ड्स की माने तो साल 2025 जून में पलामू में 252.5 मिमी बारिश हुई थी जो सामान्य 121.6 मिमी से काफी अधिक थी, और जून से अगस्त में लगभग 960 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई थी। अच्छी बारिश के कारण ही 97 प्रतिशत धान की रोपनी हो पाई थी परन्तु इतनी अच्छी बारिश के बाद भी गर्मियों की शुरुआत में ही नदी का जल स्तर गिरने से ग्रामीणों में सिंचाई और पिने के पानी चिंता होना स्वाभिक है।
हर साल जल संकट से झुझता है मेदिनीनगर निगम क्षेत्र
गर्मियों के मौसम में जिला मुख्यालय मेदिनीनगर निगम क्षेत्र के कई इलाके जल संकट से झुझते हैं। कई जगहों पर पानी की समस्या से निपटने के लिए टैंकर की व्यवस्था की जाती है। आंकड़ों की माने तो पलामू के ज्यादातर इलाके रेनशैडो एरिया के अंतर्गत आते हैं इसीलिए यहां अमूमन औसत से कम बारिश देखने को मिलती है। पिछले वर्ष को छोड़कर तकरीबन 10 वर्षों से यहां भूमिगत जल के स्तर में लगातार गिरावट दर्ज हुई है, जिसके कारण यहां की नदियां, तालाब, कुएं अक्सर सूखने की कगार पर होते हैं।
कई योजनाएं अधूरी
कोयल नदी और पलामू जिले में जल संकट से निपटने के लिए कई योजनाओं की शुरुआत तो हुई मगर लगभग सभी योजनाएं या तो अधूरी हैं या उनपर कार्य शुरू नहीं हुआ, जैसे रबर डैम। कोयल नदी का पानी रोकने और साल भर जल स्तर बनाए रखने के लिए रबर डैम योजना से लोगों को काफी उम्मीदें थी मगर योजना का काम भी तक पूरा नहीं हुआ। साथ ही काफी समय पहले जिले में सिंचाई और जल संचय के लिए मंडल डैम परियोजना शुरू की गई लेकिन यह भी अधूरी रह गई।
मोहम्मदगंज के भीम बजार में ही एक मात्र व्यवस्था है जिससे कोयल नदी का जल संचय होता है और बिहार के औरंगाबाद सहित अन्य हिस्सों की सिंचाई भी हो पाती है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि सरकार या किसी भी जनप्रतिनिधि ने मेदिनीनगर के आस-पास रबर डैम या कोई अन्य डैम बनाने की तरफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।