मुलाकात की वजह और इनकार
TMC के एक वरिष्ठ नेता ने 9 मार्च को राष्ट्रपति को पत्र लिखकर मिलने का समय मांगा था। इस 12-15 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का उद्देश्य राष्ट्रपति को पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और समुदायों के उत्थान के लिए चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देना था। हालांकि, राष्ट्रपति भवन ने समय की कमी को कारण बताते हुए इस अनुरोध को फिलहाल टाल दिया है।
विवाद की जड़, सिलीगुड़ी सम्मेलन और प्रोटोकॉल
सूत्रों के अनुसार, इस टकराव की शुरुआत पिछले हफ्ते सिलीगुड़ी में आदिवासी समुदायों के एक सम्मेलन के दौरान हुई थी। राष्ट्रपति मुर्मू ने बागडोगरा हवाई अड्डे पर उनके स्वागत के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी या किसी कैबिनेट मंत्री की अनुपस्थिति पर गंभीर सवाल उठाए थे। इसे प्रोटोकॉल का उल्लंघन माना जा रहा है।
राष्ट्रपति ने कार्यक्रम के दौरान राज्य सरकार पर कड़े प्रहार करते हुए कहा था क्या यहाँ आदिवासी समुदायों का विकास हो रहा है? मुझे नहीं लगता। ऐसा प्रतीत होता है कि राज्य सरकार सक्रिय रूप से आदिवासियों को केंद्र की योजनाओं से वंचित कर रही है।
ममता बनर्जी की तीखी प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति के बयानों को पूरी तरह राजनीतिक करार दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति को ऐसे बयान नहीं देने चाहिए जिससे उनके गरिमामय पद की छवि खराब हो। मुख्यमंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि राष्ट्रपति चुनाव से पहले भाजपा की सलाह पर राजनीति न करें।
मुलाकात का समय न मिलने के बावजूद TMC ने हार नहीं मानी है। पार्टी की ओर से अगले हफ्ते के लिए दोबारा समय मांगने हेतु राष्ट्रपति भवन को पत्र भेजा गया है। देखना यह होगा कि संवैधानिक प्रमुख और राज्य सरकार के बीच यह गतिरोध कब थमता है।