Jharkhand: झारखंड विधानसभा परिसर में पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने राज्य में महिला आयोग के गठन को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए बनाए गए इस महत्वपूर्ण संस्थान का लंबे समय से सक्रिय नहीं होना बेहद चिंताजनक है। उन्होंने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री से लेकर उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय तक ध्यान देने की अपील की।
महिला प्रतिनिधि होने के नाते जताई चिंता
अंबा प्रसाद ने कहा कि एक महिला जनप्रतिनिधि के रूप में उन्हें यह चिंता सताती है कि यदि किसी महिला के अधिकारों का हनन होता है तो वह अपनी शिकायत लेकर कहां जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य में महिला सशक्तिकरण की बातें तो बहुत की जाती हैं, लेकिन जब महिला आयोग ही अस्तित्व में नहीं है तो पीड़ित महिलाओं को न्याय मिलने में कठिनाई हो रही है।
लंबे समय से खाली हैं आयोग के पद
जानकारी के अनुसार झारखंड राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष कल्याणी शरण का कार्यकाल जून 2020 में समाप्त हो गया था। इसके बाद से अब तक आयोग में न तो नए अध्यक्ष की नियुक्ति की गई है और न ही सदस्यों की। आयोग में अध्यक्ष और पांच सदस्यों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन सभी पद फिलहाल रिक्त पड़े हैं।
हजारों शिकायतें लंबित
सूत्रों के मुताबिक महिला आयोग में चार हजार से अधिक शिकायतें दर्ज हैं, जिनमें घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, यौन शोषण और मानव तस्करी जैसे गंभीर मामले शामिल हैं। आयोग के सक्रिय नहीं होने के कारण इन मामलों की सुनवाई नहीं हो पा रही है और पीड़ित महिलाओं को न्याय मिलने में देरी हो रही है।
त्वरित कार्रवाई की मांग
पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने कहा कि सरकार को जल्द से जल्द महिला आयोग का पुनर्गठन कर अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति करनी चाहिए, ताकि पीड़ित महिलाओं को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए एक प्रभावी मंच मिल सके।