Jharkhand Vidhansabha: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के 15वें दिन सदन के भीतर जमीन के मुद्दे पर जोरदार बहस देखने को मिली. नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने आदिवासियों की जमीन का मुद्दा उठाते हुए सरकार से स्पष्ट नीति की मांग की. उन्होंने कहा कि जिस तरह विधायकों ने अपने आवास के लिए आवंटित आदिवासी जमीन को जनभावना का सम्मान करते हुए छोड़ दिया, उसी तरह सरकार को नगड़ी और जसीडीह की विवादित जमीनों पर भी अपना दावा छोड़ देना चाहिए.
नगड़ी में रिम्स-2 के निर्माण का विरोध
बाबूलाल मरांडी ने सरकार को घेरते हुए कहा कि रिम्स-2 के लिए नगड़ी में चिन्हित की गई जमीन और जसीडीह के मनीपुर की जमीन खतियानी है. उन्होंने सदन में पुरजोर तरीके से मांग रखी कि आदिवासियों की खतियानी जमीन पर किसी भी कीमत पर कब्जा नहीं होना चाहिए. मरांडी ने सरकार से मांग की कि वह सदन में यह स्पष्ट घोषणा करे कि आदिवासियों की जमीन पर रिम्स-2 का निर्माण नहीं किया जाएगा, क्योंकि यह उनके अधिकारों का हनन है.
प्रदीप यादव का तंज और पलटवार
बाबूलाल मरांडी के इस बयान पर सत्ता पक्ष के विधायक प्रदीप यादव ने तीखा तंज कसा. उन्होंने कहा कि मरांडी का आदिवासियों के प्रति यह प्रेम महज एक दिखावा है और वे केवल विरोध को दबाने के लिए इस तरह की बातें कर रहे हैं. इस टिप्पणी ने सदन का माहौल गरमा दिया, जिसके बाद दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत छींटाकशी भी शुरू हो गई.
पर्दा उठने और मंत्री पद को लेकर भिड़े दिग्गज
नोकझोंक के दौरान बाबूलाल मरांडी ने कटाक्ष करते हुए कहा कि प्रदीप यादव जितनी भी आवाज उठा लें, यदि राहुल गांधी की कृपा हुई तो वे अगली बार मंत्री बन ही जाएंगे. इस पर पलटवार करते हुए प्रदीप यादव ने कहा कि मंत्री बनने का शौक मरांडी को है, उन्हें नहीं. उन्होंने रहस्यमयी अंदाज में कहा कि कुछ बातें पर्दे में ही रहने दी जाएं, क्योंकि पर्दा उठा तो कई भेद खुल जाएंगे. इस गहमागहमी के बीच सदन की कार्यवाही में काफी देर तक गतिरोध बना रहा.