West Bengal Breaking: निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल में एक बार फिर प्रशासनिक स्तर पर बड़ा बदलाव करते हुए 17 अधिकारियों की नई पोस्टिंग की है। इस फेरबदल के तहत कई जिलों में पुलिस अधीक्षकों (SP) को बदला गया है, जिससे चुनावी प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।
बारासात और पूर्व मेदिनीपुर को मिले नए एसपी
नए आदेश के अनुसार, 2012 बैच की आईपीएस अधिकारी पुष्पा को बारासात जिले का एसपी नियुक्त किया गया है। वहीं, उसी बैच के अंशुमन साहा को पूर्व मेदिनीपुर की जिम्मेदारी सौंपी गई है। आयोग द्वारा हटाए गए अधिकारियों को फिलहाल चुनावी कार्यों से दूर रखा गया है।
कई जिलों में नए चेहरे, प्रशासन में हलचल
अन्य नियुक्तियों में 2013 बैच के अधिकारी सचिव को मुर्शिदाबाद, 2016 बैच के जसप्रीत सिंह को कूचबिहार, 2011 बैच के सूर्यप्रताप यादव को बीरभूम और 2014 बैच के राकेश सिंह को इस्लामपुर का एसपी बनाया गया है।
इसके अलावा, 2017 बैच के कुमार सनी राज को हुगली ग्रामीण, इशानी पॉल को डायमंड हार्बर और अलकनंदा भोवाल को बशीरहाट की कमान दी गई है। वहीं, अनुपम सिंह को मालदा जिले का एसपी नियुक्त किया गया है।
कोलकाता सहित कई जगहों पर डीसी और एसपी की जिम्मेदारी बदली
इसी क्रम में वाई श्रीकांत जगन्नाथ राव को कोलकाता सेंट्रल डिवीजन का डीसी बनाया गया है। साथ ही, सुरिंदर सिंह को जंगीपुर और पापिया सुल्ताना को पश्चिम मेदिनीपुर का एसपी नियुक्त किया गया है।
वरिष्ठ अधिकारियों का भी हुआ तबादला
केवल जिला स्तर ही नहीं, बल्कि उच्च पदों पर भी बदलाव किए गए हैं। 1991 बैच के डॉ. राजेश कुमार सिंह को दक्षिण बंगाल क्षेत्र का एडीजी एवं आईजीपी बनाया गया है, जबकि के. जयरामन को उत्तर बंगाल की जिम्मेदारी दी गई है।
इसके अलावा, डॉ. प्रणव कुंतार को आसनसोल-दुर्गापुर का पुलिस आयुक्त, अखिलेश कुमार चतुर्वेदी को हावड़ा और अमित कुमार सिंह को बैरकपुर का पुलिस आयुक्त नियुक्त किया गया है। सुनील कुमार यादव को चंदननगर का पुलिस आयुक्त बनाया गया है।
निष्पक्ष चुनाव को लेकर आयोग सख्त
चुनाव आयोग द्वारा लगातार किए जा रहे इन तबादलों को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। आयोग की नजर पूरे प्रशासनिक तंत्र पर बनी हुई है, ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को रोका जा सके।
चुनावी माहौल में बढ़ी प्रशासनिक सक्रियता
इन बड़े पैमाने पर हुए बदलावों के बाद राज्य में प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। अब देखना होगा कि यह नई तैनाती चुनाव प्रक्रिया को कितना प्रभावी और पारदर्शी बना पाती है।