Bokaro News: बेरमो अनुमंडल स्थित डीवीसी के बोकारो थर्मल पावर प्लांट में ऐश पोंड से छाई उठाव की रफ्तार काफी धीमी होने से प्रबंधन की परेशानी बढ़ती जा रही है. प्लांट से रोजाना बड़ी मात्रा में छाई निकल रही है, लेकिन उसके मुकाबले उठाव बहुत कम हो रहा है. इस स्थिति में ऐश पोंड के जल्दी भर जाने और पर्यावरणीय समस्याएं बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.
कम वाहनों से हो रहा छाई उठाव
फिलहाल ऐश पोंड से छाई उठाने का काम चार कंपनिया शर्मा ट्रांसपोर्ट, सारण, बी-टू-वी और जेडीएनएस कर रही हैं. ये कंपनियां राजगंज स्थित नेशनल हाईवे, बेरमो क्षेत्र के विभिन्न स्थानों, साइट-टू-साइट प्रोजेक्ट और पावर प्लांट के ऐश यार्ड तक छाई पहुंचाने का कार्य कर रही हैं. हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े काम के लिए इन कंपनियों के पास सिर्फ 16 हाईवा ही लगाए गए हैं, जिससे उठाव की गति काफी धीमी है.
रोज निकल रही हजारों टन छाई
जानकारी के अनुसार जब पावर प्लांट 500 मेगावाट के फुल लोड पर चलता है तो प्रतिदिन लगभग 3000 से 3500 मीट्रिक टन छाई ऐश पोंड में जमा हो जाती है. इसके विपरीत चारों कंपनियां मिलकर प्रतिदिन औसतन करीब 1000 मीट्रिक टन ही छाई उठा पा रही हैं. गुरुवार और शुक्रवार के आंकड़ों में भी यही स्थिति सामने आई. डीवीसी के जीएम (ऐश मैनेजमेंट सिस्टम) एए कुजूर ने बताया कि संबंधित कंपनियों को वाहनों की संख्या बढ़ाने का निर्देश दिया गया है, ताकि छाई उठाव की रफ्तार तेज हो सके.
छाई गिराने को लेकर शुरू हुई राजनीति
इधर बेरमो क्षेत्र में छाई गिराए जाने को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है. आजसू पार्टी के केंद्रीय सचिव संतोष कुमार महतो ने इस मुद्दे पर कड़ा विरोध जताते हुए कोयला मंत्रालय और संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखा है. उन्होंने बिना ठोस योजना और सुरक्षा मानकों के छाई गिराने पर रोक लगाने की मांग की है और विस्थापितों के हितों के साथ पर्यावरणीय सुरक्षा की जांच कराने की अपील की है.
पाइपलाइन मरम्मत कार्य भी रुका
उधर ऐश पोंड जाने वाली पाइपलाइन नंबर-5 में लीकेज की मरम्मत का काम भी दूसरे दिन ठप रहा. गोविंदपुर के ग्रामीणों और रैयतों ने नियोजन की मांग को लेकर काम बंद करा दिया है. ग्रामीण 30 लोगों को रोजगार देने की मांग कर रहे हैं, जबकि डीवीसी प्रबंधन का कहना है कि पहले ही 10 लोगों को काम दिया जा चुका है. शुक्रवार को वरीय जीएम (ओएंडएम) मधुकर श्रीवास्तव के साथ हुई वार्ता भी बेनतीजा रही, जिससे गतिरोध अब भी बना हुआ है.