सोमवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में मंदिर समिति के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह ने बताया कि समिति के मुख्य संरक्षक एवं पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास तथा संरक्षक चंद्रगुप्त सिंह के मार्गदर्शन में सभी तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया है।
मंदिर परिसर स्थित दोनों तालाबों की गहन सफाई कर उनमें स्वच्छ और निर्मल जल भरा गया है। पूरे मंदिर परिसर को रंग-बिरंगी रोशनी और फूलों से सजाया गया है। छठ व्रतधारियों की सेवा के लिए विशेष सेवा शिविर लगाए गए हैं। प्रातः अर्घ्य के दिन बुधवार को गाय का कच्चा दूध, अगरबत्ती, चाय और पेयजल की व्यवस्था की जाएगी। वहीं संध्या अर्घ्य के अवसर पर श्रद्धालुओं के बीच शीतल पेय शरबत का वितरण किया जाएगा।
हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के सूर्य मंदिर पहुंचने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद किया गया है। स्थानीय प्रशासन, मंदिर समिति के पदाधिकारी और सैकड़ों सदस्य मुस्तैदी से तैनात रहेंगे।
समिति के अध्यक्ष ने बताया कि श्रद्धालु “पहले आओ-पहले पाओ” की तर्ज पर घाट पर भगवान भास्कर को अर्घ्य देंगे। इसके अलावा व्रतधारियों की सुविधा के लिए मंदिर परिसर में मेडिकल कैंप और चेंजिंग रूम की भी व्यवस्था की गई है। मंदिर परिसर के सभी घाटों के प्रवेश द्वार दोपहर 2 बजे खोल दिए जाएंगे।
मंदिर समिति ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे चैती छठ पूजा के अवसर पर सूर्य मंदिर पहुंचकर भगवान भास्कर को अर्घ्य दें और पर्व को श्रद्धा व स्वच्छता के साथ मनाएं।