Jamshedpur Ration Card Cancelled: जमशेदपुर (पूर्वी सिंहभूम) में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को पारदर्शी बनाने के लिए चलाए गए विशेष सत्यापन अभियान में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी उजागर हुई है. जिले में कुल 22,689 राशन कार्ड रद्द कर दिए गए हैं. जांच में पता चला कि हजारों लाभुकों के आधार कार्ड फर्जी थे या वे डुप्लीकेट एंट्री के जरिए राशन उठा रहे थे. चौंकाने वाली बात यह है कि कई कार्डधारकों के आधार नंबर बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे पड़ोसी राज्यों की राशन सूचियों में भी सक्रिय पाए गए, जिसे "आधार सीडिंग" तकनीक के जरिए पकड़ा गया.
झारखंड में 2.43 लाख अयोग्य कार्ड बाहर
केंद्र सरकार के निर्देश पर चलाए गए इस "सफाई अभियान" का असर पूरे राज्य में दिख रहा है. झारखंड में अब तक कुल 2.43 लाख फर्जी या अयोग्य राशन कार्ड निरस्त किए जा चुके हैं. विभाग ने बायोमेट्रिक विसंगतियों, एक ही व्यक्ति के नाम पर कई कार्ड और मृत व्यक्तियों के नाम पर वर्षों से उठ रहे राशन को चिन्हित कर यह कार्रवाई की है. राज्य भर में जांचे गए 2.54 लाख संदिग्ध कार्डों में से केवल 11,479 ही वैध पाए गए, जो सिस्टम में मची लूट को दर्शाता है.
मृतकों के नाम पर भी उठ रहा था अनाज
विभागीय सूत्रों के मुताबिक, जमशेदपुर में बड़ी संख्या में ऐसे कार्ड मिले जिनमें परिवार के मृत सदस्यों के नाम अब भी दर्ज थे और उनके हिस्से का अनाज उठाया जा रहा था. केंद्र के सख्त रुख के बाद राज्य सरकार ने अपात्र लोगों को सूची से बाहर कर वास्तविक गरीबों के लिए जगह बनाई है. पूर्वी सिंहभूम के डेटा के अनुसार, गहन जांच के बाद केवल 286 लाभुकों को ही पात्र पाया गया और उनकी सदस्यता बहाल रखी गई, जबकि बाकी सभी पर गाज गिरी है.
शिकायत और सुधार का मौका
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिन लाभुकों को लगता है कि उनका कार्ड गलती से रद्द हुआ है, वे संबंधित कार्यालय में शिकायत दर्ज करा सकते हैं. डिजिटल ऑथेंटिकेशन का मुख्य उद्देश्य सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग को रोकना और राशन माफियाओं के सिंडिकेट को तोड़ना है. अब नई सूची में केवल उन्हीं लोगों को जगह दी जा रही है जिनका आधार और बायोमेट्रिक डेटा पूरी तरह सही है. इस कार्रवाई से जिले के वास्तविक जरूरतमंदों को समय पर और सही मात्रा में राशन मिलने की उम्मीद जगी है.