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  • 2026-03-29

Jharkhand News: नाबालिग से दरिंदगी करने वाले 6 दोषियों को उम्रकैद, भारी जुर्माने के साथ सख्त सजा

Jharkhand: झारखंड के लातेहार जिले में नाबालिग लड़की से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में अदालत ने सख्त फैसला सुनाते हुए 6 दोषियों को उम्रकैद की सजा दी है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (द्वितीय) सह विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) संजय कुमार दुबे की अदालत ने सभी आरोपियों को दोषी करार देते हुए कड़ी सजा सुनाई।

दोषियों में करीमन गंझू (38), मुकेश गंझू (27), सुरेश गंझू (29), पिंटू गंझू (25), बीरेंद्र गंझू (23) और रोहित ओरांव (25) शामिल हैं।

आईपीसी और पॉक्सो एक्ट के तहत सजा
अदालत ने सभी दोषियों को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376D (गैंगरेप) के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके साथ ही प्रत्येक दोषी पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में उन्हें 2 साल की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी।

इसके अलावा, पॉक्सो एक्ट की धारा 6 (गंभीर यौन अपराध) के तहत प्रत्येक दोषी को 20 साल की कठोर कैद की सजा और 5 लाख रुपये का अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया गया है। यदि यह जुर्माना नहीं भरा गया, तो एक साल की अतिरिक्त कैद होगी।
अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी सजाएं एक साथ (समवर्ती रूप से) चलेंगी।

10 मई 2022 की है घटना
यह सनसनीखेज घटना 10 मई 2022 की है। उस समय पीड़िता नाबालिग थी और अपने पिता के साथ चंदवा इलाके में घर से करीब 200 मीटर दूर आयोजित एक शादी समारोह में गई हुई थी।

रात करीब 3 बजे पिता के कहने पर वह अपनी छोटी बहन को सुलाने के लिए घर लौटी। बहन को सुलाने के बाद जब वह वापस समारोह में जाने के लिए घर का दरवाजा बंद कर रही थी, तभी पहले से घात लगाए बैठे आरोपियों ने उसे अगवा कर लिया।

इसके बाद आरोपियों ने पीड़िता को पास के एक सुनसान स्थान पर ले जाकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया।

अगले दिन दर्ज हुआ मामला, 10 गवाहों ने दी गवाही
घटना के अगले दिन यानी 11 मई 2022 को चंदवा थाना में इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज कराई गई। पुलिस ने मामले की जांच करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया और चार्जशीट दाखिल की।

सुनवाई के दौरान विशेष लोक अभियोजक शिवशंकर राम ने अदालत में कुल 10 गवाह पेश किए। गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने सभी आरोपियों को दोषी ठहराया।

सख्त सजा से दिया गया मजबूत संदेश
अदालत के इस फैसले को नाबालिगों के खिलाफ अपराध करने वालों के लिए कड़ा संदेश माना जा रहा है। यह फैसला दर्शाता है कि ऐसे जघन्य अपराधों में कानून दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शने के मूड में नहीं है।


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