Jharkhand News: झारखंड सरकार ने राज्य के युवाओं को वर्तमान समय की औद्योगिक जरूरतों के अनुसार जॉब ओरिएंटेड डिग्री (रोजगारपरक शिक्षा) प्रदान करने के लिए एक बड़ा मास्टर प्लान तैयार किया है. इसके तहत राज्य के 7 अलग-अलग जिलों में एक-एक सर्वसुविधायुक्त प्रोफेशनल कॉलेज की स्थापना की जाएगी. इन कॉलेजों को “बहु-अनुशासनिक संस्थान” (Multi-Disciplinary Institutes) के रूप में विकसित किया जाएगा. राज्य में काफी समय से भौगोलिक विषमताओं को देखते हुए सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे संस्थानों की भारी कमी महसूस की जा रही थी, जिसे दूर करने के लिए अब सरकार ने कमर कस ली है.
रांची, खूंटी और लातेहार समेत इन 13 प्रखंडों का हुआ चयन
उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने इन कॉलेजों की स्थापना के लिए चिन्हित 7 जिलों के कुल 13 संभावित प्रखंडों (Blocks) की सूची तैयार की है. इसमें रांची जिले के तमाड़, बुढ़मू और लापुंग का चयन किया गया है, जबकि खूंटी के लिए अड़की प्रखंड को शॉर्टलिस्ट किया गया है. वहीं लातेहार में बरवाडीह, महुआडांड़ या बरियातू में से किसी एक को चुना जाएगा. इसके अलावा चतरा के प्रतापपुर व हंटरगंज, पलामू के पाटन, देवघर के सारवां और धनबाद जिले के बाघमारा व तोपचांची प्रखंडों को इस लिस्ट में शामिल किया गया है.
सभी 7 जिलों के डीसी को जमीन खोजने का मिला टास्क
इन चिन्हित 13 प्रखंडों में से जहां भी उपयुक्त सरकारी जमीन की उपलब्धता सबसे पहले सुनिश्चित होगी, वहीं पर इन शानदार प्रोफेशनल कॉलेजों का निर्माण कराया जाएगा. इस बाबत उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग जल्द ही इन सातों जिलों के उपायुक्तों (DC) को आधिकारिक पत्र भेजकर प्राथमिकता के आधार पर जमीन चिन्हित कर उपलब्ध कराने का सख्त निर्देश जारी करने जा रहा है. जमीन मिलते ही इस पूरी योजना की प्रशासनिक स्वीकृति लेने की समानांतर (Parallel) कागजी कार्रवाई भी विभाग स्तर पर तेजी से पूरी कर ली जाएगी.
स्थानीय उद्योगों की मांग के अनुसार चलेंगे वोकेशनल कोर्स
हाल के वर्षों में राज्य में कई नए इंजीनियरिंग कॉलेज तो खुले हैं, लेकिन शुद्ध रूप से व्यावसायिक और रोजगारपरक शिक्षा देने वाले संस्थानों का अभी भी भारी अभाव था. विधानसभा सत्रों के दौरान भी कई स्थानीय विधायक अपने-अपने क्षेत्रों में ऐसे कॉलेजों की मांग प्रमुखता से उठाते रहे हैं. इन संस्थानों के खुलने का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि इनमें स्थानीय आर्थिक क्षमता और उभरती हुई क्षेत्रीय मांगों के अनुरूप बिल्कुल नए जॉब ओरिएंटेड और वोकेशनल कोर्सेस संचालित किए जाएंगे, जिससे पढ़ाई पूरी करते ही स्थानीय युवाओं को नौकरी मिल सके.