Jharkhand News: झारखंड राज्य विश्वविद्यालय संविदा शिक्षक संघ ने सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति में हो रही देरी को लेकर सरकार से हस्तक्षेप की अपील की है. संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार पाण्डेय ने कहा कि जेपीएससी द्वारा वर्ष 2018 में शुरू की गई नियमित और बैकलॉग पदों की बहाली प्रक्रिया अब तक अधूरी है, जो आयोग की निष्क्रियता को दर्शाता है. उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य के विश्वविद्यालयों में पिछले 8 वर्षों से कार्यरत आवश्यकता आधारित शिक्षक यूजीसी की सभी योग्यताएं पूरी करते हैं. ऐसे में सरकार को इन अनुभवी शिक्षकों की सेवा को नियमित करना चाहिए ताकि उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की कमी दूर हो सके.
2400 पदों की नई बहाली में विशेष प्रावधान की मांग
संघ ने जेपीएससी को भेजी गई 2400 शिक्षकों की नई बहाली प्रक्रिया के संदर्भ में भी अपनी मांग स्पष्ट की है. डॉ. पाण्डेय ने सरकार से आग्रह किया है कि वर्तमान में कार्यरत लगभग 600 आवश्यकता आधारित शिक्षकों के पदों को इस नई नियुक्ति प्रक्रिया से अलग रखा जाए. संघ का सुझाव है कि इन पदों पर पहले से अपनी सेवाएं दे रहे योग्य शिक्षकों को ही समायोजित कर उन्हें सेवा का अधिकार दिया जाए. शिक्षकों का तर्क है कि उनके पदों को नई बहाली में शामिल करना उनके भविष्य के साथ अन्याय होगा, जबकि वे वर्षों से विभाग की रीढ़ बने हुए हैं.
छात्रों के भविष्य और शिक्षा की गुणवत्ता पर जोर
शिक्षक संघ का मानना है कि नियुक्ति प्रक्रिया का लंबे समय तक खिंचना न केवल शिक्षकों के लिए मानसिक तनाव का कारण है, बल्कि इससे छात्रों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है. डॉ. पाण्डेय ने कहा कि अनुभवी शिक्षकों को नियमित करने से विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक वातावरण बेहतर होगा. संघ ने सरकार से जेपीएससी के साथ संवाद कर शेष बचे विषयों पर साक्षात्कार की प्रक्रिया जल्द संपन्न कराने की मांग की है. अब देखना यह है कि राज्य सरकार इन 600 शिक्षकों के समायोजन और रुकी हुई भर्तियों को लेकर क्या ठोस कदम उठाती है.