Leadership Conclave 2026: ऑल इंडिया मैनेजमेंट एसोसिएशन (AIMA) के लीडरशिप कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए टाटा स्टील के एमडी और सीईओ टीवी नरेंद्रन ने कहा कि भारत के लिए ऊर्जा स्रोतों और क्रिटिकल मिनरल्स में विविधता लाना अनिवार्य है, लेकिन यह एक बहुस्तरीय जोखिम भी है. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल आयात पर निर्भरता कम करने जैसा सरल मामला नहीं है, बल्कि उन कूटनीतिक और रणनीतिक फैसलों से जुड़ा है जो आपूर्ति को सुचारू बनाए रखते हैं. नरेंद्रन के अनुसार, वैश्विक अस्थिरता के बीच अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करना भारत के लिए एक बड़ी आर्थिक और कूटनीतिक परीक्षा साबित होने वाली है.
वैश्विक संकटों के बीच भारत के लिए सुनहरा अवसर
टीवी नरेंद्रन ने कहा कि रूस-यूक्रेन संघर्ष, पश्चिम एशिया संकट और टूटी हुई ग्लोबल सप्लाई चेन ने दुनिया के व्यापारिक समीकरण बदल दिए हैं. हालांकि, इन झटकों के बीच भारत के पास एक बड़ा अवसर है, क्योंकि पूरी दुनिया अब एक भरोसेमंद साझेदार और स्थिर बाजार की तलाश में है. उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को न केवल अपनी जरूरतों के लिए निर्माण करना चाहिए, बल्कि वैश्विक बाजार में एक प्रमुख निर्यातक के रूप में भी खुद को स्थापित करना होगा. असली चुनौती यह होगी कि भारत इस बदली हुई वैश्विक परिस्थिति का लाभ उठाने में कितना सक्षम साबित होता है.
क्रिटिकल मिनरल मिशन और भविष्य की तैयारी
भारत ने लिथियम, कोबाल्ट और तांबा जैसे 30 खनिजों को "क्रिटिकल" श्रेणी में चिह्नित किया है, जो क्लीन-एनर्जी, सेमीकंडक्टर और रक्षा प्रणालियों के लिए अनिवार्य हैं. सरकार ने घरेलू खनन को बढ़ावा देने और विदेशी अधिग्रहण को प्रोत्साहित करने के लिए "राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन" भी लॉन्च किया है. नरेंद्रन का यह बयान संकेत देता है कि एनर्जी ट्रांजिशन के इस दौर में भारत को अपनी खनिज सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए घरेलू उत्पादन ढांचे को मजबूत करने के साथ-साथ वैश्विक भू-राजनीति में भी चतुराई से कदम बढ़ाने होंगे.