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  • 2026-04-11

UP SIR: उत्तर प्रदेश में वोटर लिस्ट से 2.04 करोड़ नाम हटे, भाजपा के गढ़ वाले शहरों में सबसे ज्यादा कटौती

UP SIR: उत्तर प्रदेश में सघन पुनरीक्षण अभियान (SIR) के बाद जारी नई वोटर लिस्ट ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है. इस प्रक्रिया में करीब 2.04 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं. दिलचस्प बात यह है कि सबसे ज्यादा कटौती उन शहरी क्षेत्रों में दर्ज की गई है, जिन्हें लंबे समय से भाजपा का मजबूत आधार माना जाता रहा है.
बड़े शहरों में 18 से 23 प्रतिशत तक वोट कटे, लखनऊ से मेरठ तक असर
राज्य निर्वाचन से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, लखनऊ, गाजियाबाद, नोएडा, कानपुर नगर और मेरठ जैसे प्रमुख शहरों में मतदाता संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है.
लखनऊ में लगभग 22.89 प्रतिशत, गाजियाबाद में करीब 20 प्रतिशत, नोएडा में 19.33 प्रतिशत, कानपुर नगर में 19.42 प्रतिशत और मेरठ में 18.75 प्रतिशत तक नाम हटाए गए हैं. ये सभी क्षेत्र ऐसे माने जाते हैं जहां भाजपा का लगातार मजबूत प्रदर्शन रहा है, इसलिए इन आंकड़ों ने राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा तेज कर दी है.

मुस्लिम बहुल जिलों में अपेक्षाकृत कम कटौती, एक नया और अलग ही ट्रेंड सामने आया
इसके उलट, जिन जिलों में मुस्लिम आबादी अधिक है, वहां वोटों की कटौती अपेक्षाकृत कम रही है. सहारनपुर में 10.48 प्रतिशत, मुरादाबाद में करीब 10 प्रतिशत, शामली में 10.93 प्रतिशत और मुजफ्फरनगर में 10.38 प्रतिशत वोट हटाए गए हैं. अमरोहा और आजमगढ़ जैसे जिलों में भी यह आंकड़ा 9 से 10 प्रतिशत के बीच ही रहा है. इस अंतर ने राजनीतिक विश्लेषण को और गहरा कर दिया है, क्योंकि अलग-अलग क्षेत्रों में अलग ट्रेंड देखने को मिला है.

VIP सीटों पर बदल सकता है समीकरण, कम अंतर वाली सीटों पर बढ़ी चुनौती
वोटों की इस बड़ी कटौती का असर कई अहम सीटों पर भी पड़ सकता है. प्रयागराज की शहर दक्षिणी सीट पर करीब 99,059 वोट हटे हैं, जबकि पिछली बार जीत का अंतर 26,182 वोट था. प्रतापगढ़ की कुंडा सीट पर 53,539 वोट कम हुए हैं, जबकि जीत का अंतर 30,418 था. देवरिया की पथरदेवा सीट पर भी इसी तरह के बदलाव देखे जा रहे हैं, जिससे मुकाबला और कड़ा हो सकता है.

सघन पुनरीक्षण की वजह क्या, विपक्ष ने उठाए सवाल
यह अभियान 2003 के बाद पहली बार इतने बड़े स्तर पर चलाया गया है. अधिकारियों के अनुसार, हटाए गए नामों में वे लोग शामिल हैं जो स्थानांतरित हो चुके हैं, जिनकी मृत्यु हो चुकी है या जिनके दस्तावेज अधूरे पाए गए. हालांकि, विपक्षी दल इस प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं और इसे चुनावी प्रभाव से जोड़कर देख रहे हैं.

उत्तर प्रदेश में वोटर लिस्ट में हुए इस बड़े बदलाव ने साफ कर दिया है कि आने वाले चुनाव में आंकड़ों की भूमिका बेहद अहम रहने वाली है. अब नजर इस बात पर रहेगी कि यह बदलाव राजनीतिक दलों की रणनीति और चुनावी नतीजों को किस तरह प्रभावित करता है.
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