Jharkhand Politics: भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा कोर्ट में दाखिल हलफनामे के आधार पर राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया है. उन्होंने कहा कि जिस बोकारो वन भूमि घोटाले को राज्य की सीआईडी (CID) ने महज 3-4 करोड़ रुपये का बताकर ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश की, उसी मामले में ईडी ने 500 करोड़ रुपये के विशाल मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का पर्दाफाश किया है. शाहदेव ने आरोप लगाया कि राज्य की एजेंसियां भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय भ्रष्टाचारियों के लिए कवच का काम कर रही हैं.
रामेश्वर उरांव के बयान से सरकार की घेराबंदी
प्रतुल शाहदेव ने कांग्रेस नेता रामेश्वर उरांव के पुराने बयानों का हवाला देते हुए राज्य सरकार पर तीखा प्रहार किया. उन्होंने याद दिलाया कि उरांव ने खुद स्वीकार किया था कि जिन मामलों को सरकार लटकाना या भटकाना चाहती है, उन्हें अक्सर एसीबी या सीआईडी के हवाले कर दिया जाता है. भाजपा के अनुसार, बोकारो घोटाले में यह बात पूरी तरह सच साबित हुई है, जहां सीआईडी की सुस्ती ने बड़े घोटालेबाजों को बचने का पूरा मौका दिया.
सत्ता के संरक्षण और बिचौलियों का नेटवर्क
भाजपा ने जांच के दायरे को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि इतने बड़े पैमाने पर वन भूमि की खरीद-फरोख्त बिना राजनीतिक संरक्षण के संभव नहीं है. उन्होंने आशंका जताई कि जांच को केवल अंचल अधिकारी (CO) जैसे छोटे स्तर के अधिकारियों तक सीमित रखना असली मास्टरमाइंड को बचाने की साजिश है. ईडी की जांच में शेल कंपनियों और बिचौलियों के जिस सिंडिकेट का खुलासा हुआ है, वह राज्य में व्याप्त संगठित आर्थिक अपराध की पोल खोलता है.
उच्चस्तरीय अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
भाजपा ने मांग की है कि इस घोटाले में शामिल उच्च अधिकारियों और सत्ता के करीबियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए. प्रतुल शाहदेव ने कहा कि 500 करोड़ का यह आंकड़ा केवल शुरुआत हो सकती है, यदि गहराई से जांच हो तो यह राज्य का सबसे बड़ा भूमि घोटाला साबित होगा. फिलहाल, ईडी के इस खुलासे के बाद राज्य सरकार की छवि पर एक बार फिर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लग रहे हैं, जिससे आने वाले दिनों में प्रशासनिक फेरबदल और राजनीतिक तनाव बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं.