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  • 2026-04-14

Jharkhand News: झारखंड में 96 करोड़ से ज्यादा का हिसाब गायब, सरकारी विभागों में वित्तीय अनुशासन पर बड़ा सवाल

Jharkhand News: झारखंड में सरकारी खजाने के प्रबंधन को लेकर एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है. राज्य के कई विभागों में वित्तीय अनुशासन की खुलेआम अनदेखी हो रही है. ताजा आंकड़ों के मुताबिक, करीब 96 करोड़ 71 लाख रुपये से अधिक की राशि का पक्का हिसाब अब तक सरकारी फाइलों में ही दबा पड़ा है. यह मामला वित्तीय वर्ष 2023-24 से 2025-26 के बीच का है, जिसमें करोड़ों रुपये के डीसी बिल (Detailed Contingent Bills) अब तक कोषागार में जमा नहीं किए गए हैं.


एसी और डीसी बिल का खेल समझिए

सरकारी खर्च में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए एक तय प्रक्रिया होती है. एसी बिल (Abstract Contingent Bill) के जरिए विभाग आपात या जरूरी कामों के लिए बिना पूरा दस्तावेज दिए एडवांस पैसा निकाल लेते हैं. इसके बाद नियम के अनुसार, उस पैसे के खर्च का पूरा ब्यौरा डीसी बिल (Detailed Contingent Bill) के रूप में जमा करना जरूरी होता है, जिसमें हर खर्च की रसीद और वाउचर शामिल होते हैं.

लेकिन हैरानी की बात यह है कि जो हिसाब कुछ हफ्तों में जमा होना चाहिए था, वह सालों से लंबित है. ऐसे में यह साफ नहीं हो पा रहा है कि यह पैसा सही काम में खर्च हुआ या नहीं.

स्वास्थ्य विभाग सबसे बड़ा डिफॉल्टर
आंकड़ों के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग इस मामले में सबसे आगे है. इस विभाग ने अकेले 78 करोड़ 66 लाख 89 हजार 929 रुपये का हिसाब अब तक जमा नहीं किया है.
वहीं, गृह विभाग का भी 25 करोड़ 58 लाख 35 हजार 345 रुपये का डीसी बिल लंबित है, जो कानून-व्यवस्था जैसे अहम विभाग के लिए चिंता का विषय है.

अन्य विभागों में भी लापरवाही

सिर्फ बड़े विभाग ही नहीं, बल्कि अन्य विभागों में भी लापरवाही सामने आई है:
• पर्यटन विभाग: 10 करोड़ 93 लाख 40 हजार 828 रुपये लंबित

• डोरंडा ट्रेजरी: 9 करोड़ 14 लाख 41 हजार 117 रुपये

• अन्य विभाग (आईटी, श्रम, निर्वाचन): करीब 2.5 करोड़ रुपये


उठ रहे बड़े सवाल
इतनी बड़ी राशि का वर्षों तक हिसाब न देना न केवल वित्तीय नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सरकारी पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है. बिना डीसी बिल के यह पता लगाना मुश्किल है कि पैसा सही जगह खर्च हुआ या कहीं गड़बड़ी हुई है.

अब देखना होगा कि सरकार इस मामले में क्या कार्रवाई करती है और जिम्मेदार अधिकारियों पर कब तक जवाबदेही तय होती है.

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