Jharkhand News: झारखंड सरकार ने राज्य की कानून व्यवस्था और विकास कार्यों को गति देने के लिए हाल ही में 17 आईएएस (IAS) और 44 आईपीएस (IPS) अधिकारियों का तबादला किया है. जिलों के उपायुक्त (DC) और पुलिस अधीक्षक (SP) बदलने से प्रशासनिक कामकाज में नई ऊर्जा आने की उम्मीद तो है, लेकिन इसका एक बड़ा वित्तीय पक्ष भी है. एक राजपत्रित अधिकारी के स्थानांतरण पर सरकार को औसतन 1.75 लाख से 2.5 लाख रुपए तक खर्च करने पड़ते हैं. इस गणित के हिसाब से 61 अधिकारियों के इस फेरबदल से राज्य के संचित कोष पर लगभग 1.2 करोड़ से 1.5 करोड़ रुपए का भार पड़ेगा.
क्यों आता है इतना खर्च?
झारखंड सेवा नियमावली के तहत, जब किसी अधिकारी का तबादला एक शहर से दूसरे शहर होता है, तो उन्हें कई तरह के भत्ते दिए जाते हैं. इसमें सबसे महत्वपूर्ण स्थानांतरण अनुदान (Transfer Grant) होता है, जो अधिकारी के मूल वेतन का एक निश्चित हिस्सा होता है. इसके अलावा, अधिकारी और उनके परिवार के लिए पुराने पदस्थापन स्थल से नए स्थान तक का यात्रा भत्ता (TA) भी सरकार वहन करती है. यह पूरी प्रक्रिया सरकारी नियमों के तहत पारदर्शी तरीके से पूरी की जाती है.
सामान ढुलाई और जॉइनिंग टाइम का खर्च
तबादले के खर्च का एक बड़ा हिस्सा निजी सामान, फर्नीचर और वाहन की ढुलाई में जाता है. इसके लिए ट्रकों के किलोमीटर के आधार पर भुगतान किया जाता है. साथ ही, स्थानांतरण के दौरान अधिकारियों को नए पद पर योगदान देने के लिए 10 से 12 दिनों का “कार्यभार ग्रहण काल” (Joining Time) मिलता है. इस अवधि का वेतन भी स्थानांतरण व्यय का ही हिस्सा माना जाता है. चूंकि आईएएस और आईपीएस अधिकारियों का वेतनमान ऊंचा होता है, इसलिए उनके भत्तों की राशि भी उसी अनुपात में बढ़ जाती है.
विकास बनाम वित्तीय भार
प्रशासनिक दृष्टिकोण से देखें तो समय-समय पर अधिकारियों का कार्यक्षेत्र बदलना जरूरी होता है ताकि किसी भी जिले में कामकाज में जड़ता न आए. हालांकि, करोड़ों रुपए के इस खर्च को लेकर अक्सर सवाल उठते हैं, लेकिन बेहतर शासन और प्रभावी कानून व्यवस्था के लिए यह एक आवश्यक निवेश है. अब देखना यह है कि इतनी बड़ी राशि खर्च करने के बाद नए जिलों में तैनात हुए ये “कप्तान” विकास की रफ्तार को कितनी गति दे पाते हैं.