Jharkhand News: झारखंड के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग में चोरी ऊपर से सीनाजोरी का एक अनोखा मामला सामने आया है. विभाग का एक मामूली थर्ड ग्रेड कर्मचारी, संतोष कुमार, 23 करोड़ रुपये के भारी-भरकम घोटाले को अंजाम देकर अब पूरी सरकारी मशीनरी को हंफा रहा है. घोटाले की रकम इतनी बड़ी थी कि इसमें प्रवर्तन निदेशालय (ED) को हस्तक्षेप करना पड़ा और एजेंसी संतोष के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल कर चुकी है. विडंबना यह है कि इतना बड़ा कांड होने के बावजूद यह कर्मचारी विभागीय कार्यवाही से लगातार भाग रहा है.
पांच बार बुलावा, हर बार नदारद
विभाग की लाचारी का आलम यह है कि आरोपी को तलाशने और उसका पक्ष सुनने के लिए अब तक पांच बार आधिकारिक पत्राचार किया जा चुका है. संतोष कुमार को इसी साल 22 जनवरी, 6 फरवरी, 20 फरवरी, 6 मार्च और 25 मार्च को हाजिर होने का निर्देश दिया गया था, लेकिन उसने हर बार विभाग के आदेश को ठेंगा दिखा दिया. विभागीय प्रक्रिया में शामिल न होकर उसने न केवल जांच में बाधा डाली है, बल्कि सरकारी नियमों की धज्जियां भी उड़ा दी हैं.
अखबारों में विज्ञापन देकर अंतिम मौका
जब सीधे पत्राचार का कोई असर नहीं हुआ, तो मजबूरन विभाग को समाचार पत्रों में प्रेस रिलीज और विज्ञापन जारी करना पड़ा है. विभाग ने इसे अंतिम अल्टीमेटम बताते हुए संतोष कुमार को 28 अप्रैल 2026 को सुबह 11:30 बजे नेपाल हाउस सचिवालय के कमरा नंबर 213 में उपस्थित होने का निर्देश दिया है. विभाग ने साफ कर दिया है कि यह अपना पक्ष रखने का आखिरी मौका है, इसके बाद किसी भी देरी को स्वीकार नहीं किया जाएगा.
एकतरफा कार्रवाई की तैयारी में विभाग
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित तिथि और समय पर संतोष कुमार हाजिर नहीं होता है, तो विभाग उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर एकतरफा निर्णय लेगा. हालांकि, आरोपी के पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए विभाग के भीतर भी इस बात की प्रबल आशंका है कि वह इस बार भी गायब ही रहेगा. फिलहाल, 23 करोड़ के इस गबन मामले ने विभाग की कार्यशैली और निगरानी तंत्र पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं.