NCRB 2024 Report: नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड में पारंपरिक अपराधों के मुकाबले आर्थिक फ्रॉड और साइबर ठगी के मामलों में बड़ा उछाल आया है. वर्ष 2024 में धोखाधड़ी के 1,927 और जालसाजी के 535 मामले दर्ज किए गए हैं, जो पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक हैं. बैंकिंग फ्रॉड और ऑनलाइन ठगी के बढ़ते सक्रिय नेटवर्क अब जांच एजेंसियों के लिए एक बड़ी और नई चुनौती बनकर उभरे हैं.
हत्या के मामलों में कमी, पर बच्चों की गुमशुदगी चिंताजनक
रिपोर्ट के सुखद पहलू की बात करें तो राज्य में कुल संज्ञेय अपराधों में 5.8 प्रतिशत की गिरावट आई है और हत्या के मामले भी 1,581 से घटकर 1,472 रह गए हैं. हालांकि, बच्चों की गुमशुदगी के आंकड़े डराने वाले हैं. साल 2024 में 1,042 बच्चे लापता हुए, जिनमें 639 लड़कियां शामिल हैं. पुलिस ने पुराने मामलों सहित 2,262 लोगों को खोजने में सफलता तो पाई है, लेकिन बच्चों का इस तरह गायब होना बाल श्रम और मानव तस्करी के खतरे की ओर इशारा करता है.
मानव तस्करी और रेलवे अपराधों में भारी बढ़ोतरी
झारखंड में मानव तस्करी का दाग अब भी गहरा बना हुआ है. वर्ष 2024 में एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट्स ने 97 मामले दर्ज किए, जिनमें कुल 282 पीड़ित मिले, और इनमें 208 सिर्फ बच्चे हैं. इसके अलावा, रेलवे क्षेत्र अपराधियों का नया सुरक्षित ठिकाना बनता दिख रहा है. रेलवे पुलिस के अधिकार क्षेत्र में अपराध के मामले 745 से बढ़कर 1,058 तक पहुंच गए हैं, जिनमें ट्रेनों और स्टेशनों पर होने वाली चोरी और मोबाइल स्नैचिंग की घटनाएं प्रमुख हैं.
जांच की रफ्तार सुस्त, लंबित मामलों का लगा पहाड़
रिपोर्ट में झारखंड पुलिस के जांच तंत्र पर भी सवाल उठे हैं. राज्य में चार्जशीट की दर केवल 64.8 प्रतिशत रही, जिसे राष्ट्रीय औसत के मुकाबले कमजोर माना जा रहा है. साल के अंत तक 55,681 मामले लंबित रहे, जो पुलिस बल पर बढ़ते काम के दबाव और संसाधनों की कमी को उजागर करते हैं. हालांकि एससी-एसटी अत्याचार के मामलों में कमी दर्ज की गई है, लेकिन इन मामलों में जांच समय पर पूरी न होना अब भी बड़ी बाधा बनी हुई है.