Ranchi News : कल्याण विभाग के अधीन संचालित आवासीय विद्यालयों में कार्यरत अंशकालीन शिक्षकों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर शुक्रवार से लोकभवन के पास अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। झारखंड के अलग-अलग जिलों से पहुंचे शिक्षकों ने मानदेय में वृद्धि और हाईकोर्ट के आदेश को लागू करने की मांग उठाई।धरना में शामिल शिक्षकों का कहना है कि वर्षों से कठिन परिस्थितियों में काम करने के बावजूद उन्हें बेहद कम मानदेय दिया जा रहा है। गुमला से पहुंची शिक्षिका शबनम सुल्तान ने बताया कि नेतरहाट पहाड़ के ऊपरी क्षेत्र स्थित विद्यालय में पढ़ाने के लिए उन्हें और अन्य महिला शिक्षकों को जंगलों के बीच घंटों ट्रकों का इंतजार करना पड़ता है। खराब मौसम में भी कोई सुरक्षित व्यवस्था उपलब्ध नहीं रहती।
छुट्टियों का भुगतान काटने का भी आरोप
शिक्षकों ने आरोप लगाया कि शनिवार-रविवार के अलावा दशहरा, ईद, बकरीद, क्रिसमस और गर्मी की छुट्टियों का भुगतान भी काट लिया जाता है। उनका कहना है कि असुर जनजाति के बच्चों को अपने बच्चों की तरह पढ़ाने और देखभाल करने के बावजूद आर्थिक स्थिति लगातार खराब होती जा रही है।
चतरा के शिक्षक विनय कुमार वर्मा ने कहा कि उन्हें घंटे के हिसाब से भुगतान किया जाता है, जबकि अन्य विद्यालयों में शिक्षकों को मासिक वेतन मिलता है। उन्होंने बताया कि हर 11 महीने पर सेवा विस्तार दिया जाता है, लेकिन मार्च 2026 के बाद अब तक एक्सटेंशन नहीं मिला है। साथ ही 2016 से अब तक मानदेय में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई।
हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद कार्रवाई नहीं
धरना में शामिल शिक्षक विकास कुमार जायसवाल ने कहा कि इस मुद्दे को लेकर कई बार कल्याण विभाग और विभागीय मंत्री से बातचीत की गई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। इसके बाद शिक्षकों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
उन्होंने बताया कि 13 जनवरी 2026 को हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि अंशकालीन शिक्षकों को पहाड़िया विद्यालयों के शिक्षकों की तर्ज पर मानदेय दिया जाए और आदेश लागू करने के लिए 12 सप्ताह का समय दिया गया था। बावजूद इसके अब तक सरकार की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई।
अंशकालीन शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।