Dhanbad: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने धनबाद में गहराते अपराध और कथित पुलिस-अपराधी साठगांठ को लेकर राज्य की सियासत में हलचल तेज कर दी है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लिखे एक पत्र में मरांडी ने धनबाद की स्थिति को जंगलराज से भी बदतर बताया है। उन्होंने दावा किया है कि कोयला राजधानी में कानून का नहीं, बल्कि गैंगस्टरों और भ्रष्टाचार का बोलबाला है। मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने इसकी जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) से कराने की पुरजोर मांग की है।
गैंगस्टर के वीडियो से मचा हड़कंप, वर्दी पर उठे गंभीर सवाल
बाबूलाल मरांडी ने अपने पत्र में गैंगस्टर प्रिंस खान द्वारा विदेश से जारी किए गए हालिया वीडियो का हवाला दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि धनबाद में स्थिति इतनी भयावह हो गई है कि वहां अब अपराधी और कुछ वर्दीधारी तंत्र मिलकर वसूली का नेटवर्क चला रहे हैं। मरांडी ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि धनबाद में अपराधियों के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और पाकिस्तान से हथियार मंगाने की खबरें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा हैं, जिसकी अनदेखी करना राज्य के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है।
वसूली के लिए पोस्टिंग का खेल, व्यापारियों में दहशत का माहौल
मरांडी ने आरोप लगाया कि संवेदनशील जिलों में करोड़ों रुपये देकर अधिकारियों की पोस्टिंग की जा रही है। उन्होंने कहा कि इन नियुक्तियों का मकसद कानून व्यवस्था सुधारना नहीं, बल्कि अवैध कोयला खनन और व्यापारियों से वसूली करना है। पत्र में साफ तौर पर धनबाद के वर्तमान एसएसपी को तत्काल हटाने की मांग की गई है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि आज धनबाद का व्यापारी, उद्योगपति और आम नागरिक खौफ के साये में जीने को मजबूर है, क्योंकि अपराधियों को सत्ता का संरक्षण प्राप्त है।
स्वतंत्र जांच की जरूरत, माफिया और भ्रष्टाचार पर वार
बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि माइनिंग माफिया, कोयला लूट और जमीन कब्जाने जैसे गंभीर आरोपों की किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक पुलिस और अपराधियों के इस कथित गठजोड़ को नहीं तोड़ा जाएगा, तब तक राज्य में निवेश और शांति संभव नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया और विशेष अभियान नहीं चलाया, तो राज्य की स्थिति पूरी तरह बेकाबू हो जाएगी। फिलहाल इस पत्र के बाद धनबाद से लेकर रांची तक राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है।