Jharkhand Politics: झारखंड की सत्ताधारी महागठबंधन सरकार में शामिल कांग्रेस पार्टी के भीतर मची खींचतान अब सार्वजनिक हो गई है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश की कार्यशैली और संगठनात्मक फैसलों को लेकर वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं में भारी असंतोष देखा जा रहा है. पार्टी के अंदरखाने नेतृत्व परिवर्तन की लामबंदी तेज हो गई है. कई नेताओं का मानना है कि मौजूदा संगठन सरकार के साथ तालमेल बिठाने और कार्यकर्ताओं की उम्मीदों पर खरा उतरने में विफल साबित हो रहा है.
मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने भाषा विवाद पर खोला मोर्चा
कांग्रेस की इस गुटबाजी ने तब नया मोड़ ले लिया जब मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. भाषा विवाद के मुद्दे पर गठित मंत्रियों के समूह में शामिल किशोर ने सार्वजनिक रूप से प्रदेश अध्यक्ष से पार्टी का आधिकारिक पक्ष स्पष्ट करने को कहा है. उनके इस कड़े रुख से यह संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी के भीतर संवाद और भरोसे का संकट गहरा चुका है, जिसका असर सरकार की छवि पर भी पड़ रहा है.
झामुमो को सता रही है सरकार की स्थिरता की चिंता
कांग्रेस के इस आपसी झगड़े पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पार्टी झामुमो (JMM) की पैनी नजर है. झामुमो नेतृत्व को डर है कि सहयोगी दल की अंदरूनी कलह का सीधा असर सरकार की स्थिरता और आपसी समन्वय पर पड़ सकता है. विभागों के पुन: बंटवारे और राजनीतिक हिस्सेदारी को लेकर बढ़ती असहमति ने गठबंधन की सियासत को एक मुश्किल मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है. झामुमो चाहता है कि कांग्रेस जल्द अपना विवाद सुलझाए ताकि गठबंधन की एकजुटता बनी रहे.
विपक्ष ने साधा निशाना, महागठबंधन पर बढ़ा दबाव
महागठबंधन की इस अस्थिरता का लाभ उठाने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भी घेराबंदी शुरू कर दी है. भाजपा लगातार कांग्रेस की कलह को मुद्दा बनाकर सरकार की मजबूती पर सवाल उठा रही है. आगामी राजनीतिक रणनीतियों और चुनाव की तैयारियों के बीच कांग्रेस के भीतर का यह घमासान अगर जल्द शांत नहीं हुआ, तो इसका सीधा फायदा विपक्ष को मिल सकता है. फिलहाल सबकी नजरें दिल्ली दरबार पर टिकी हैं कि कांग्रेस आलाकमान इस संकट से कैसे निपटता है.