Jharkhand News: स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक नियुक्ति परीक्षा 2016 के विवाद को लेकर झारखंड हाई कोर्ट में सोमवार को महत्वपूर्ण सुनवाई हुई. राज्य सरकार और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की ओर से दायर अपील पर मुख्य न्यायाधीश एम. एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने अब 10 जून की तारीख मुकर्रर की है. जेएसएससी के अधिवक्ताओं ने अदालत को सूचित किया कि मामले की अपील लंबित होने के बावजूद फैक्ट फाइंडिंग कमेटी समानांतर रूप से सुनवाई कर रही है, जिसने ग्रीष्मावकाश के दौरान 16 मई को भी बैठक तय की है.
फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के अध्यक्ष बदले, जांच में तेजी के निर्देश
अदालत को यह जानकारी भी दी गई कि एकल पीठ ने अपने आदेश में संशोधन करते हुए सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति गौतम कुमार चौधरी को फैक्ट फाइंडिंग कमेटी का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है. इससे पहले न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने तीन महीने के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया था. कमेटी का मुख्य कार्य नियुक्ति प्रक्रिया में हुई संभावित गड़बड़ियों और मेरिट लिस्ट की पारदर्शिता की जांच करना है, ताकि योग्य उम्मीदवारों के साथ न्याय हो सके.
दस्तावेजों की सॉफ्ट कॉपी लेने से कमेटी का इनकार
शनिवार को पुराने हाई कोर्ट भवन में हुई कमेटी की बैठक में सरकार और जेएसएससी की कार्यशैली पर सवाल उठे. सुनवाई के दौरान कमेटी ने उन दस्तावेजों की सॉफ्ट कॉपी स्वीकार करने से मना कर दिया, जिनकी मूल प्रति मांगी गई थी. कमेटी ने नाराजगी जताते हुए स्पष्ट किया कि सभी रिकॉर्ड्स आधिकारिक रूप से प्रस्तुत किए जाने चाहिए. इस दौरान माध्यमिक शिक्षा निदेशक और जेएसएससी के उपसचिव व्यक्तिगत रूप से उपस्थित थे, जिन्हें प्रक्रिया का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया गया.
16 मई तक सभी रिकॉर्ड पेश करने का मिला अंतिम अल्टीमेटम
कमेटी ने राज्य सरकार और जेएसएससी को अंतिम अवसर देते हुए 16 मई तक स्टेट मेरिट लिस्ट, नियुक्त शिक्षकों के नाम, प्राप्तांक और नियुक्ति तिथि जैसे सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज शपथ पत्र के साथ जमा करने का आदेश दिया है. याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं ने भी कमेटी के समक्ष अपना पक्ष मजबूती से रखा. अब 10 जून को होने वाली हाई कोर्ट की सुनवाई और कमेटी की आगामी रिपोर्ट पर हजारों अभ्यर्थियों की निगाहें टिकी हैं.