Jharkhand News: झारखंड में कथित अवैध वाहन नीलामी और खनन नियमों के दुरुपयोग से जुड़े मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है. अदालत ने तत्कालीन लातेहार उपायुक्त भोरे सिंह यादव को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है. साथ ही वर्तमान लातेहार डीसी और जिला खनन पदाधिकारी को भी कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया गया है.
मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ में हुई. यह याचिका अशोक सिंह की ओर से दायर की गई है.
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि झारखंड मिनरल प्रिवेंशन ऑफ इलीगल माइनिंग ट्रांसपोर्टेशन एंड स्टोरेज रूल 2017 के तहत जब्ती और नीलामी की गई कार्रवाई को हाईकोर्ट पहले ही अधिकार क्षेत्र से बाहर मान चुका है.
इसके बावजूद जिला प्रशासन ने वाहन मालिक को रॉयल्टी और जुर्माना जमा कर वाहन छुड़ाने का विकल्प देने के बाद भी वाहन की नीलामी कर दी और उसे तीसरे पक्ष को सौंप दिया.
हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई में भी सवाल उठाया था कि पुनरीक्षण याचिका दाखिल करने की समय सीमा खत्म होने से पहले वाहन की नीलामी कैसे कर दी गई. अदालत ने इसे पहली नजर में मनमानी कार्रवाई मानते हुए गंभीर टिप्पणी की थी.
मामले में यह भी बताया गया कि वाहन की नीलामी के कारण याचिकाकर्ता को बैंक ऋण, बढ़ते ब्याज और आजीविका से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने अगली सुनवाई में संबंधित अधिकारियों की उपस्थिति अनिवार्य कर दी है.