Maratha Reservation Protest: महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण की चिंगारी एक बार फिर सुलग उठी है. मराठा आंदोलन के प्रमुख चेहरे मनोज जरांगे पाटिल ने राज्य सरकार के खिलाफ दोबारा मोर्चा खोलने का एलान कर दिया है. जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में आयोजित एक विशाल बैठक के दौरान भारी भीड़ को संबोधित करते हुए जरांगे पाटिल ने घोषणा की कि वे आगामी 30 मई 2026 से फिर से आमरण अनशन (भूख हड़ताल) पर बैठेंगे. उन्होंने मौजूदा सरकार पर वादाखिलाफ़ी का आरोप लगाते हुए कहा कि आठ महीने से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी सरकार ने "सातारा गजट" को लागू करने का अपना लिखित वादा पूरा नहीं किया है.
सीएम देवेंद्र फडणवीस पर सीधा हमला: "इतनी नफरत क्यों?"
सभा में मनोज जरांगे पाटिल ने सीधे तौर पर राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को निशाने पर लिया. उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, "मैं देवेंद्र फडणवीस का निजी विरोधी नहीं हूं, लेकिन सच कहना मेरी मजबूरी है. फडणवीस ने ही मराठा समाज के गरीब बच्चों को कुणबी प्रमाण पत्र दिए जाने की पूरी प्रक्रिया को रोक रखा है. आखिर सरकार को मराठा समाज से इतनी नफरत क्यों है? वे मराठा बच्चों को आगे बढ़ते हुए क्यों नहीं देखना चाहते?" जरांगे ने मांग की कि 1994 के सरकारी संकल्प (जीआर) की तर्ज पर ही सातारा और कोल्हापुर संस्थान का भी जीआर निकाला जाए. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर 30 मई से पहले प्रमाण पत्र जारी नहीं हुए, तो आगामी दिनों में सरकार की "छुट्टी" तय है.
नेताओं से दूरी बनाने की अपील और करोड़ों रुपये की साजिश का दावा
मनोज जरांगे ने मराठा समुदाय को सियासी दलों से सतर्क रहने की हिदायत देते हुए कहा कि अगर लोग राजनीतिक पार्टियों के चक्कर में पड़े रहे, तो अपने बच्चों का भविष्य बर्बाद कर बैठेंगे. इसके साथ ही उन्होंने सरकार पर आंदोलन को कुचलने के लिए करोड़ों रुपये की साजिश रचने का एक सनसनीखेज आरोप भी लगाया. जरांगे ने दावा किया, "एक मौजूदा मंत्री ने एक संगठन को मेरे खिलाफ दुष्प्रचार करने और मुझे बदनाम करने के लिए 2 करोड़ रुपये देने का फैसला किया था. लेकिन जिन लोगों को यह सुपारी दी गई, वे खुद मेरे पास आए और सारा सच उगल दिया." जरांगे के इस आक्रामक रुख और अनशन की नई तारीख के एलान के बाद महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में एक बार फिर भारी हलचल पैदा हो गई है.