Jamshedpur News: शहर में हेल्थ इंश्योरेंस से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है. जानकारी के अनुसार, एक व्यक्ति ने वर्ष 2023 में पॉलिसी बाजार के माध्यम से केयर हेल्थ इन्शुरन्स की हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदी थी. परिवार का कहना है कि भविष्य में किसी भी मेडिकल इमरजेंसी से बचाव और बेहतर इलाज की उम्मीद से यह पॉलिसी ली गई थी. परिजनों के मुताबिक, समय-समय पर प्रीमियम भी जमा किया जाता रहा और पॉलिसी पूरी तरह सक्रिय थी.
तबीयत बिगड़ने पर मेडिटरेनियन हॉस्पिटल में कराया गया भर्ती
परिजनों ने बताया कि पिछले महीने अचानक व्यक्ति की तबीयत काफी खराब हो गई। हालत गंभीर होने के बाद उन्हें तत्काल मेडिटरेनियन हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया. अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में इलाज शुरू हुआ और मरीज की स्थिति को देखते हुए लगातार मेडिकल प्रक्रियाएं की जा रही थीं.
इलाज के दौरान अस्पताल का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा था, इसलिए परिवार ने इंश्योरेंस कंपनी से कैशलेस इलाज की सुविधा लेने के लिए क्लेम प्रक्रिया शुरू की.
परिजनों का दावा- दो बार अप्रूव हुआ था क्लेम
मृतक के परिजनों का आरोप है कि इंश्योरेंस कंपनी की ओर से क्लेम को दो बार अप्रूव किया गया था. इससे परिवार को यह भरोसा हो गया था कि इलाज का खर्च बीमा कंपनी द्वारा वहन किया जाएगा. परिजनों के अनुसार, अस्पताल और कंपनी के बीच दस्तावेजों की प्रक्रिया भी पूरी की जा चुकी थी.
परिवार का कहना है कि क्लेम अप्रूवल की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने इलाज को लेकर किसी प्रकार की आर्थिक चिंता नहीं की और पूरी उम्मीद के साथ मरीज का इलाज जारी रखा.
अंतिम समय में क्लेम रिजेक्ट होने से बढ़ी परेशानी
परिजनों के अनुसार, मरीज की हालत गंभीर बनी हुई थी और उसी दौरान अचानक कंपनी की ओर से क्लेम रिजेक्ट कर दिया गया. परिवार का आरोप है कि बिना स्पष्ट कारण बताए अंतिम समय में क्लेम रद्द कर दिया गया, जिससे वे पूरी तरह टूट गए.
क्लेम रिजेक्ट होने के बाद अस्पताल का बिल तुरंत जमा करने का दबाव परिवार पर आ गया. मरीज की स्थिति को देखते हुए परिजनों ने किसी तरह खुद पैसे की व्यवस्था कर अस्पताल में भुगतान किया ताकि इलाज जारी रह सके.
इलाज के दौरान नहीं बच सकी मरीज की जान
परिवार के मुताबिक, आर्थिक और मानसिक तनाव के बीच इलाज जारी रहा, लेकिन आखिरकार मरीज की मौत हो गई. इस घटना के बाद परिवार में गहरा दुख और आक्रोश है. परिजनों का कहना है कि उन्होंने इलाज के लिए हर संभव कोशिश की, लेकिन संकट के समय इंश्योरेंस कंपनी ने उनका साथ नहीं दिया.
परिवार का यह भी आरोप है कि यदि समय पर क्लेम का लाभ मिल जाता तो इलाज में और मदद मिल सकती थी.
केयर इंश्योरेंस कार्यालय पहुंचकर की मुआवजे की मांग
मरीज की मौत के बाद परिजन केयर हेल्थ इन्शुरन्स के कार्यालय पहुंचे और कंपनी के खिलाफ नाराजगी जताई. परिजनों ने मुआवजे की मांग करते हुए कहा कि पहले क्लेम अप्रूव करना और बाद में उसे रद्द कर देना पूरी तरह गलत है.
परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच, क्लेम रिजेक्ट किए जाने के कारणों की जानकारी और उचित कार्रवाई की मांग की है. वहीं, इस पूरे मामले में कंपनी की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.