Uttarakhand Forest Fire: देवभूमि उत्तराखंड के पहाड़ी इलाके एक बार फिर वनाग्नि (फॉरेस्ट फायर) की गंभीर चपेट में हैं. शनिवार की शाम टिहरी जिले के जंगलों से अचानक उठी आग की गगनचुंबी लपटों ने स्थानीय प्रशासन और वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर दी. जिला मुख्यालय से बेहद सटीक बुदोगी गांव के समीपवर्ती जंगलों में लगी यह आग इतनी भयावह थी कि इसकी विनाशकारी लपटें और धुएं का गुबार कई किलोमीटर दूर से साफ दिखाई दे रहा था.
14 हेक्टेयर वन संपदा को नुकसान, आबादी वाले क्षेत्रों को सुरक्षित बचाया
टिहरी के डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO) पुनीत तोमर ने बताया कि आग की सूचना मिलते ही वन विभाग की त्वरित रेस्क्यू टीमों को युद्धस्तर पर राहत कार्य के लिए रवाना किया गया. वन विभाग के प्रारंभिक आकलन के अनुसार, इस भीषण आग की चपेट में आने से लगभग 14 हेक्टेयर में फैली बहुमूल्य वन संपदा जलकर नष्ट हो गई है. गनीमत यह रही कि आग का रुख नीचे की तरफ हो गया, जिससे वनकर्मियों को इसे इंसानी बस्तियों और रिहाइशी इलाकों में फैलने से रोकने में सफलता मिली.
तेज गर्मी और शुष्क मौसम ने बढ़ाई वनाग्नि की तीव्रता, जांच के आदेश
पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में पिछले कुछ दिनों से जारी भीषण गर्मी और शुष्क हवाओं के कारण जंगलों की यह आग तेजी से फैली. हालांकि, मौसम विभाग द्वारा पर्वतीय क्षेत्रों में आगामी दिनों के लिए बारिश और आंधी-तूफान का अलर्ट जारी किए जाने से वनाग्नि पर प्राकृतिक नियंत्रण की उम्मीद जगी है. वन विभाग ने टिहरी के जंगलों में अचानक लगी इस आग के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए उच्चस्तरीय जांच के आदेश जारी कर दिए हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि यह प्राकृतिक घटना थी या किसी मानवीय लापरवाही का नतीजा.
युद्धस्तर पर चला अग्निशमन अभियान, किसी जनहानि की सूचना नहीं
अधिकारियों ने पुष्टि की है कि समय रहते उठाए गए सुरक्षात्मक कदमों और वन विभाग की मुस्तैदी के कारण किसी भी प्रकार की जनहानि या पालतू मवेशियों के नुकसान की खबर नहीं है. दुर्गम पहाड़ी रास्तों और तेज हवाओं के बावजूद वनकर्मियों ने आग के मुख्य स्रोतों को चारों तरफ से घेरकर उस पर काबू पा लिया है. प्रशासन ने स्थानीय ग्रामीणों से भी अपील की है कि वे जंगलों के आसपास सूखी पत्तियां या कचरा जलाने से बचें और किसी भी स्थान पर धुआं दिखने पर तुरंत नियंत्रण कक्ष को सूचित करें.