Viral Video News: सोशल मीडिया पर एक भावुक कर देने वाला वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक महिला अपनी बुजुर्ग सास को पीठ पर लादकर सड़क पर पैदल चलते हुए दिखाई दे रही है. बताया जा रहा है कि यह वीडियो छत्तीसगढ़ के मैनपाट का है. वीडियो में दिख रही महिला का नाम सुखमनिया बताया जा रहा है, जो अपनी सास की बंद पड़ी पेंशन शुरू कराने के लिए करीब तीन किलोमीटर पैदल चलकर बैंक पहुंची.
चार महीने से बंद थी बुजुर्ग महिला की पेंशन
जानकारी के मुताबिक जंगलपाड़ा गांव की रहने वाली सुखमनिया की सास को हर महीने 500 रुपये की पेंशन मिलती थी. पहले बैंक मित्र खुद घर पहुंचकर यह राशि दे जाता था, लेकिन केवाईसी प्रक्रिया पूरी नहीं होने की वजह से पिछले तीन से चार महीनों से पेंशन आना बंद हो गया था. पेंशन बंद होने के बाद परिवार को लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा था. ऐसे में सुखमनिया ने खुद अपनी बुजुर्ग सास को बैंक ले जाने का फैसला किया.
बिना किसी को बताए सास को पीठ पर बैठाकर बैंक पहुंची बहू
सुखमनिया ने बताया कि 22 मई को वह बिना किसी को जानकारी दिए अपनी सास को पीठ पर लादकर मैनपाट कस्बे में स्थित सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की शाखा तक पहुंची. रास्ता आसान नहीं था, लेकिन पेंशन दोबारा शुरू कराने की उम्मीद में वह लगातार पैदल चलती रही. बैंक पहुंचने के बाद केवाईसी से जुड़ी सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी की गईं. प्रक्रिया पूरी होते ही बैंक ने तुरंत चार महीने की लंबित पेंशन की राशि जारी कर दी. सुखमनिया की सास को एक साथ 2,000 रुपये दिए गए.
पंचायत अधिकारी ने कहा अब घर पहुंचकर मिलेगी पेंशन
मैनपाट जनपद पंचायत की मुख्य कार्यकारी अधिकारी खुशबू शास्त्री ने पूरे मामले की जानकारी देते हुए कहा कि पहले बैंक मित्र हर महीने घर जाकर पेंशन की राशि पहुंचाते थे. जनवरी में आखिरी बार महिला को घर पर पेंशन मिली थी.
उन्होंने बताया कि केवाईसी प्रक्रिया में देरी होने के कारण यह सेवा पिछले चार महीनों से बंद थी. हालांकि अब सभी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं और अगले महीने से बुजुर्ग महिला को फिर से घर पर ही पेंशन की राशि मिलने लगेगी.
लोगों को भावुक कर रहा बहू का संघर्ष और जिम्मेदारी
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो को देखकर लोग सुखमनिया की जमकर तारीफ कर रहे हैं. कई लोग इसे परिवार और रिश्तों की मिसाल बता रहे हैं, तो कुछ लोग ग्रामीण इलाकों में बुजुर्गों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में आने वाली परेशानियों पर सवाल उठा रहे हैं. यह वीडियो सिर्फ एक बहू के संघर्ष की कहानी नहीं, बल्कि उन मुश्किलों की भी तस्वीर है जिनसे आज भी गांवों में कई बुजुर्ग और गरीब परिवार गुजर रहे हैं.