Jamtara: झारखंड में वैध बालू कारोबार शुरू कराने की कोशिशों के बीच जामताड़ा जिला प्रशासन की सुस्ती सवालों के घेरे में आ गई है। जिले के बांकेट बालू घाट की लीज एग्रीमेंट फाइल पिछले 10 दिनों से उपायुक्त कार्यालय में लंबित पड़ी है, जिसके कारण वैध बालू कारोबार अब तक शुरू नहीं हो सका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। बाजार में बालू की कीमत कई गुना बढ़ गई है, जबकि अवैध कारोबारियों को इसका फायदा मिल रहा है। साथ ही सरकार को भी राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
जामताड़ा का सबसे बड़ा बालू घाट माना जाता है बांकेट घाट
जानकारी के अनुसार, बांकेट बालू घाट को जामताड़ा जिले का सबसे बड़ा बालू घाट माना जाता है। यहां करीब 6 लाख 28 हजार सीएफटी बालू रिजर्व है। घाट का कुल क्षेत्रफल 4.51 हेक्टेयर बताया गया है और इसे फरवरी 2026 में पर्यावरण स्वीकृति भी मिल चुकी है। नीलामी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ग्राम सभा, स्टांप ड्यूटी कैलकुलेशन और मॉडल डीड अपडेट समेत सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई थीं। इसके बाद करीब 10 दिन पहले लीज एग्रीमेंट के लिए फाइल डीसी कार्यालय भेजी गई, लेकिन अब तक उस पर हस्ताक्षर नहीं हो सके हैं।
कई जिलों में हो चुका है एग्रीमेंट
सूत्रों के मुताबिक नई बालू घाट बंदोबस्ती नियमावली लागू होने के बाद शुरुआती दिनों में कई जिलों में एग्रीमेंट प्रक्रिया को लेकर असमंजस की स्थिति थी। बाद में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सहमति के बाद रांची, बोकारो, जमशेदपुर, लातेहार, गोड्डा और हजारीबाग समेत कई जिलों में एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। इसके बावजूद जामताड़ा में फाइल लंबित रहने को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि खान विभाग ने 35 बालू घाटों की प्रक्रिया जल्द पूरी करने का निर्देश दिया था, लेकिन जामताड़ा प्रशासन इस दिशा में अपेक्षित तेजी नहीं दिखा रहा है।
लोगों ने जल्द एग्रीमेंट की मांग की
स्थानीय लोगों का कहना है कि सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बावजूद एग्रीमेंट में देरी समझ से परे है। उनका कहना है कि यदि समय पर बालू घाट शुरू हो जाता, तो लोगों को सस्ती दरों पर बालू मिलती, निर्माण कार्यों की लागत कम होती और बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार भी मिलता।