Bengal Politics: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है. राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में सिलीगुड़ी के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई है. शिकायत दर्ज होने के बाद राजनीतिक गलियारों से लेकर सामाजिक संगठनों तक इस मामले की चर्चा तेजी से हो रही है. पुलिस ने बताया कि एक अधिवक्ता द्वारा दी गई शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.
20 मई को दी गई थी शिकायत, कानूनी प्रक्रिया के बाद दर्ज हुई FIR
जानकारी के मुताबिक अधिवक्ता रिंकी चट्टोपाध्याय सिंह ने 20 मई 2026 को यह शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायतकर्ता का आरोप है कि शुरुआती स्तर पर पुलिस ने मामला दर्ज करने में रुचि नहीं दिखाई थी. हालांकि लगातार कानूनी प्रक्रिया और फॉलोअप के बाद आखिरकार एफआईआर दर्ज कर ली गई.
शिकायत में कहा गया है कि ममता बनर्जी द्वारा अलग अलग सार्वजनिक मंचों से दिए गए कुछ बयान सनातन हिंदू समाज की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले थे. शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि इन बयानों का असर देश ही नहीं बल्कि विदेशों में रहने वाले हिंदू समुदाय पर भी पड़ा है.
धर्मतला प्रदर्शन और धार्मिक कार्यक्रम के बयानों पर उठे सवाल
एफआईआर में जिन बयानों का जिक्र किया गया है, उनमें एक बयान वर्ष 2025 के दौरान आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम से जुड़ा बताया गया है. वहीं दूसरा बयान विधानसभा चुनाव से पहले धर्मतला में आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान दिया गया था.
शिकायतकर्ता का कहना है कि किसी संवैधानिक पद पर रहे नेता द्वारा इस तरह के बयान देना सामाजिक और धार्मिक सौहार्द के लिए उचित नहीं माना जा सकता. शिकायत में यह भी कहा गया है कि ऐसे बयान समाज में तनाव और विभाजन की स्थिति पैदा कर सकते हैं.
भड़काऊ टिप्पणी का आरोप भी शामिल
मामले में ममता बनर्जी पर भड़काऊ बयान देने का आरोप भी लगाया गया है. शिकायतकर्ता के अनुसार एक बयान में यह कहा गया था कि अगर एक विशेष समुदाय चाहे तो वह दूसरे समुदाय को पांच मिनट में खत्म कर सकता है.
अधिवक्ता ने इस बयान को लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक मर्यादा के खिलाफ बताया है. शिकायत में कहा गया है कि इस तरह की टिप्पणियां समाज में तनाव बढ़ा सकती हैं और कानून व्यवस्था पर भी असर डाल सकती हैं.
BNS की कई धाराओं में मामला दर्ज
पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की कई धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है. इसमें धारा 351, 352, 353, 354, 356 और 299 शामिल हैं.
इन धाराओं में आपराधिक धमकी, धार्मिक भावनाएं आहत करना, गलत सूचना फैलाना, शांति भंग करने के उद्देश्य से अपमान और आपराधिक मानहानि जैसे आरोप शामिल हैं. शिकायतकर्ता का आरोप है कि संबंधित बयान जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण तरीके से दिए गए थे.
वीडियो फुटेज और डिजिटल सबूतों की जांच में जुटी पुलिस
सिलीगुड़ी पुलिस कमिश्नरेट के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की है कि शिकायत मिलने के बाद कानून के अनुसार एफआईआर दर्ज कर ली गई है. पुलिस अब मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है.
जांच के दौरान संबंधित वीडियो फुटेज, सार्वजनिक भाषणों की रिकॉर्डिंग और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच की जा सकती है. फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर तृणमूल कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.
राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने के आसार
इस मामले के सामने आने के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में आरोप प्रत्यारोप और तेज होने की संभावना जताई जा रही है. विपक्षी दल पहले भी ममता बनर्जी पर तुष्टिकरण की राजनीति करने के आरोप लगाते रहे हैं.
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनावी माहौल के बीच यह मुद्दा आने वाले दिनों में और ज्यादा राजनीतिक रंग ले सकता है. ऐसे में इस मामले को लेकर सियासी बयानबाजी और विवाद बढ़ने की संभावना बनी हुई है.